‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ यानी एक राष्ट्र, एक चुनाव को लेकर देशभर में समर्थन जुटाने की कवायद तेज हो गई है। इसी क्रम में रविवार को हरिद्वार में आयोजित संत समागम में एक राष्ट्र, एक चुनाव के मुद्दे पर व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी, योग गुरु बाबा रामदेव समेत बड़ी संख्या में संत-महात्मा मौजूद रहे। संतों ने एक स्वर में इसे देश की प्रगति और विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।
योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को सभी संतों का आशीर्वाद मिला है, क्योंकि संतों के लिए राष्ट्रहित से बढ़कर कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव होने से देश की शिक्षा व्यवस्था से लेकर अर्थव्यवस्था तक पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। बाबा रामदेव ने कहा कि कुछ नेताओं को आशंका है कि इससे क्षेत्रीय दलों के सामने चुनौतियां बढ़ सकती हैं, लेकिन देश का मतदाता समझदार है और वह जानता है कि राज्य के लिए कौन सही है और देश के लिए कौन।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने कहा कि आजादी के बाद देश में शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होते थे, लेकिन धीरे-धीरे यह व्यवस्था समाप्त हो गई। उन्होंने सुझाव दिया कि छह महीने की अवधि केवल चुनाव के लिए निर्धारित की जाए। इस दौरान पहले लोकसभा, फिर विधानसभा और उसके बाद नगर पालिका एवं नगर निगम के चुनाव कराए जाएं। शेष समय विकास कार्यों को गति देने में लगाया जाए।
श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को लेकर सुझाव और समर्थन की शुरुआत हरिद्वार से हुई है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार से शुरू होने वाले आंदोलनों और अभियानों का देश में व्यापक प्रभाव पड़ता है और यह पहल भी निश्चित रूप से सफल होगी। संत समागम में वक्ताओं ने चुनावी प्रक्रिया में बार-बार होने वाले खर्च और आचार संहिता के कारण विकास कार्यों पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए एक साथ चुनाव की आवश्यकता पर जोर दिया।
