मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में वर्षों से लंबित राजस्व मामलों को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आम नागरिक की जमीन, संपत्ति और अधिकारों से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती। राजस्व न्यायालयों में चल रही ‘तारीख पर तारीख’ की प्रवृत्ति हर हाल में बदलनी होगी। मुख्यमंत्री ने नायब तहसीलदार से लेकर राजस्व परिषद तक पांच वर्ष से अधिक पुराने सभी मामलों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर समयबद्ध ढंग से निस्तारित करने के निर्देश दिए।
शासन के वरिष्ठ अधिकारियों और फील्ड में तैनात पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनहित से जुड़े विषयों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में राजस्व मामलों, जनशिकायतों, अपराध नियंत्रण, आगामी त्योहारों की सुरक्षा व्यवस्था और बाढ़ राहत कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने जनता दर्शन और आईजीआरएस के माध्यम से प्राप्त शिकायतों के निस्तारण को लेकर भी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिकायत का निस्तारण महज कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि शिकायतकर्ता की वास्तविक समस्या का समाधान होना चाहिए। किसी भी शिकायत को निस्तारित करने से पहले संबंधित तथ्यों और अभिलेखों की विधिवत जांच की जाए और जरूरी रिपोर्ट प्राप्त की जाए।
समीक्षा के दौरान ऐसे मामले सामने आए, जिनमें मूल शिकायत के बजाय दूसरी जानकारी के आधार पर प्रकरण का निस्तारण कर दिया गया या आवश्यक रिपोर्ट लिए बिना ही शिकायत बंद कर दी गई। मुख्यमंत्री ने असंतुष्ट फीडबैक वाले मामलों का दोबारा परीक्षण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में निस्तारण गलत या असंतोषजनक पाया जाए, उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय संबंधित जिलाधिकारी अथवा पुलिस कप्तान को भेजेगा और पांच दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की प्राथमिकता शिकायतों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि आमजन की समस्या का वास्तविक और स्थायी समाधान करना है।
बैठक में राजस्व परिषद की ओर से नायब तहसीलदार, उपजिलाधिकारी, जिलाधिकारी, मंडलायुक्त और राजस्व परिषद स्तर पर लंबित नामांतरण, सीमांकन, पैमाइश, अंश निर्धारण, वरासत, बंटवारा और भू-उपयोग से जुड़े मामलों की जिलावार स्थिति प्रस्तुत की गई। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में राजस्व न्यायालयों की कोर्टवार समीक्षा स्वयं करने और लंबित मामलों की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से धारा 33 के अविवादित वरासत मामलों को मिशन मोड में निस्तारित करने को कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व मामलों के समयबद्ध निस्तारण से आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी और उन्हें वर्षों तक अधिकारियों व न्यायालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उन्होंने लंबित मामलों के निस्तारण के लिए स्पष्ट समयबद्ध कार्ययोजना बनाने और उसकी प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा।
बैठक में 13 जुलाई से 23 अगस्त के बीच प्रदेश में अपराध की स्थिति की भी समीक्षा की गई। अपर पुलिस महानिदेशक, कानून-व्यवस्था ने बताया कि 13 से 19 जुलाई की तुलना में 17 से 23 अगस्त की अवधि में कुल एफआईआर में 0.4 प्रतिशत, गंभीर अपराधों में 5.1 प्रतिशत, महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में 3.9 प्रतिशत और अनुसूचित जाति/जनजाति के विरुद्ध अपराधों में 11.2 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
मुख्यमंत्री ने अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस को लगातार सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महिला और बाल अपराधों में त्वरित कार्रवाई के साथ संवेदनशीलता भी सुनिश्चित की जाए। जोन और रेंज स्तर पर हर सप्ताह क्राइम एनालिसिस करने और अपराध की वास्तविक स्थिति का नियमित आकलन करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने महिला बीट पुलिस अधिकारियों की सक्रियता बढ़ाने के साथ छेड़खानी और चेन स्नेचिंग जैसी घटनाओं पर कठोर कार्रवाई करने को कहा।
आगामी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, विश्वकर्मा पूजा और गणेश चतुर्थी को देखते हुए मुख्यमंत्री ने पुलिस-प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मथुरा-वृंदावन में जन्माष्टमी के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, इसलिए क्राउड कंट्रोल की विस्तृत कार्ययोजना पहले से तैयार की जाए। श्री बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन के साथ समन्वय कर अलग सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन योजना बनाने तथा आवश्यकता के अनुसार होल्डिंग एरिया विकसित करने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने वृंदावन में नया पुलिस सर्किल गठित कर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती और मथुरा-वृंदावन के लिए अलग-अलग जॉइंट मजिस्ट्रेट की तैनाती के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि सभी थानों और पुलिस लाइनों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाए। थानों में आकर्षक झांकियां सजाई जाएं और स्थानीय लोगों को भी इसमें सहभागी बनाया जाए।
गणेश चतुर्थी के बाद प्रतिमा विसर्जन के दौरान विशेष सुरक्षा व्यवस्था के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हाईटेंशन तारों से दुर्घटना की आशंका को देखते हुए प्रतिमाओं की ऊंचाई निर्धारित सीमा के भीतर रखी जाए। प्रदेश की कई नदियां इस समय उफान पर हैं, इसलिए विसर्जन स्थलों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। संवेदनशील क्षेत्रों में पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती, शरारती तत्वों पर नजर और स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाओं की पहले से समीक्षा सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री ने माफियाओं के खिलाफ अभियान लगातार जारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने गो-तस्करी, धर्मांतरण, धार्मिक स्थलों में तोड़फोड़ और महापुरुषों की प्रतिमाओं से छेड़छाड़ जैसी घटनाओं को लेकर पुलिस-प्रशासन को 24×7 अलर्ट रहने को कहा। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को किसी भी स्थिति में नहीं होने दिया जाना चाहिए, क्योंकि ये कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं। मुख्यमंत्री ने स्लाटर हाउस की नियमित औचक जांच कराने और अनियमितता मिलने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए।
मुख्यमंत्री ने चित्रकूट, फर्रुखाबाद, अयोध्या, आजमगढ़ और बाराबंकी के जिलाधिकारियों से बाढ़ राहत कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि राहत कार्य पूरी संवेदनशीलता के साथ किए जाएं और राहत सामग्री की गुणवत्ता की जिलाधिकारी स्वयं निगरानी करें। राहत शिविरों में लोगों को पर्याप्त और गरम भोजन उपलब्ध कराने के साथ जलभराव वाले क्षेत्रों में सर्पदंश से बचाव के लिए एंटी-वेनम तथा एंटी-रेबीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने लंपी डिजीज से बचाव के लिए पशुपालन विभाग को तत्काल आवश्यक कदम उठाने और बाढ़ का पानी उतरने के बाद संभावित संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग को प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल कैंप लगाने के निर्देश दिए।
