गोरखपुर की माटी से तैयार टेराकोटा शिल्प अब वैश्विक बाजार में अपनी नई पहचान बनाने को तैयार है। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होने वाले उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) के चौथे संस्करण में गोरखपुर के टेराकोटा उत्पादों के चार विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। यहां स्थानीय शिल्पकारों को देश-विदेश के खरीदारों, निर्यातकों और बड़े कारोबारी समूहों से सीधे जुड़ने का अवसर मिलेगा।
यूपीआईटीएस में टेराकोटा ज्वेलरी, होम डेकोरेशन और अन्य उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे। उद्योग विभाग ने इसके लिए दीपिका सिंह, सुनीता मौर्या, कमलेश तिवारी और कोमल मद्देशिया का चयन किया है। विभाग के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय मंच पर उत्पादों की ब्रांडिंग से टेराकोटा के निर्यात और नए बाजारों तक पहुंच की संभावनाएं बढ़ेंगी।गोरखपुर के भटहट ब्लॉक स्थित औरंगाबाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में टेराकोटा का काम पीढ़ियों से होता आ रहा है।
वर्ष 2018 में टेराकोटा को गोरखपुर के एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) में शामिल किए जाने के बाद इस पारंपरिक शिल्प को नई पहचान और बाजार मिला। शिल्पकारों को विद्युत चालित चाक, पगमिल और अनुदान आधारित ऋण जैसी सुविधाएं मिलने से उत्पादन क्षमता बढ़ी है।सरकारी स्तर पर लगातार ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध होने से टेराकोटा की मांग में भी बढ़ोतरी हुई है। इसका असर शिल्पकारों की आर्थिक स्थिति पर दिखाई दे रहा है। कई शिल्पकार अब पक्के मकानों और आधुनिक वर्कशॉप में काम कर रहे हैं। वहीं नई पीढ़ी भी आधुनिक डिजाइन और तकनीक सीखकर पुश्तैनी कारोबार से जुड़ रही है। यूपीआईटीएस में चार स्टॉल के जरिए गोरखपुर की माटी से बने इन उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
