“आ गए… मेरी मौत का तमाशा देखने?” फिल्म ‘क्रांतिवीर’ का यह संवाद और नाना पाटेकर की दमदार आवाज आज भी सिनेमा प्रेमियों के जेहन में गूंजती है। अपने सशक्त अभिनय, बेबाक संवाद अदायगी और अलग अंदाज से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाने वाले दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का निधन हो गया। उनके निधन की खबर से फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है।
नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उन्होंने वर्ष 1978 में फिल्म ‘गमन’ से अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की। शुरुआती दौर में उन्होंने कई चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं निभाईं और धीरे-धीरे अपनी दमदार अदाकारी के दम पर हिंदी सिनेमा में अलग पहचान बनाई। ‘अंकुश’ और ‘परिंदा’ जैसी फिल्मों ने उन्हें पहचान दिलाई, जबकि ‘क्रांतिवीर’ ने उनके अभिनय को नई ऊंचाई दी। नाना की संवाद अदायगी, चेहरे के हावभाव और किरदार में पूरी तरह उतर जाने की क्षमता उन्हें अपने दौर के अन्य कलाकारों से अलग बनाती थी।करीब पांच दशक लंबे फिल्मी सफर में नाना पाटेकर ने गंभीर से लेकर हास्य तक कई तरह के किरदार निभाए। ‘प्रहार’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों ने खूब सराहा। वहीं ‘वेलकम’ में उदय शेट्टी के किरदार ने उनकी गंभीर छवि से अलग हास्य का नया रंग दर्शकों के सामने रखा। उनके अभिनय की खासियत यह थी कि वह किरदार को केवल निभाते नहीं थे, बल्कि उसमें पूरी तरह उतर जाते थे।
नाना पाटेकर की शख्सियत का एक अलग पहलू उनका खाना बनाने का शौक भी था। एक फिल्म की शूटिंग के दौरान वह एक दिन कैमरे के सामने अभिनेता की भूमिका में नहीं, बल्कि सेट पर बावर्ची के रूप में नजर आए। उन्होंने फिल्म की पूरी टीम के लिए अपने हाथों से खास डिश तैयार की थी। बताया जाता है कि इस व्यंजन की रेसिपी उन्हें अपनी मां से मिली थी। नाना का यह अंदाज उनके सहकर्मियों के बीच उनकी सहज और जमीन से जुड़ी शख्सियत को दर्शाता था।अपने अभिनय के लिए नाना पाटेकर को तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया। उन्होंने अपने अभिनय के जरिए कई ऐसे किरदार दिए, जिन्हें भारतीय सिनेमा के यादगार पात्रों में गिना जाता है।
