दरगाह पर चढ़ाई चादर, मांगी खास दुआ
सपा के वरिष्ठ नेता और महासचिव आजम खान जेल से बाहर आने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से नज़र आए। उन्होंने अजमेर शरीफ दरगाह पहुंचकर सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती गरीब नवाज़ की दरगाह पर हाजिरी दी और देश-समाज की भलाई के लिए दुआ मांगी।
विज़िटर रजिस्टर में लिखा दिल छू लेने वाला संदेश
दरगाह के विज़िटर रजिस्टर में आजम खान ने उर्दू में एक दिल को छू जाने वाला शेर लिखा। उन्होंने सबसे पहले “बिस्मिल्लाहि रहमानिर्रहीम” लिखा और फिर अपने जज़्बात यूं बयां किए —
“जिसे ले गई है अभी हवा वो वर्क था दिल की किताब का, कहीं आंसुओं से लिखा हुआ, कहीं आंसुओं से मिटा हुआ…”
इसके बाद उन्होंने लिखा कि “पूरी मिल्लत ए इस्लामिया पल-पल घुल रही है, उम्मत को अब अल्लाह की खास तवज्जो की जरूरत है।”
आजम खान ने खुद को “खादिमों का खादिम और नाचीज़” बताते हुए अंत में दुआ मांगी —
“ए अल्लाह इस मुकाम पर की गई दुआओं की लाज रख और मिल्लत को पूरी दुनिया में बचाने के लिए कुन फरमा दीजिए। आमीन।”
सपा नेता के शब्दों में झलका दर्द
आजम खान के शब्दों से साफ झलकता है कि वे मुसलमानों की मौजूदा हालत को लेकर गहराई से चिंतित हैं। उन्होंने सूफी संतों की विरासत पर भरोसा जताया और उम्मत के लिए रहमत की दुआ मांगी।
परिवार और करीबी नेता भी रहे साथ
आजम खान के साथ उनके छोटे बेटे अब्दुल्लाह आजम, सपा नेता यूसुफ मलिक, अनवार, और सालिम भी मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि इस दौरान उन्होंने कुछ समय तक दरगाह परिसर में रुककर मन्नत भी मांगी।
सैकड़ों मुकदमों में फंसे हैं आजम खान
आजम खान और उनके परिवार पर सैकड़ों मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें से कुछ में सजा भी हो चुकी है। वर्तमान में वह जमानत पर बाहर हैं और लम्बे समय बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से किसी धार्मिक स्थल पर जाकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।



