आईएएनएस से बातचीत में जिन्ना, पाकिस्तान और बांग्लादेश का जिक्र करते हुए दिए बयान, सोशल और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
प्रसिद्ध कथावाचक स्वामी अनिरुद्धाचार्य एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं, रविवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान उन्होंने मुसलमानों, दलितों और ऐतिहासिक घटनाओं को लेकर कई टिप्पणियां कीं, जिस पर विवाद खड़ा हो गया है, अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि उनके अनुसार भारत में मुसलमानों का बहिष्कार नहीं है, लेकिन हिंदुओं के प्रति कथित नफरत की विचारधारा का विरोध किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि दलितों को बहकाने का प्रयास कुछ मुसलमानों द्वारा किया जाता है।
जिन्ना और पाकिस्तान का जिक्र:
स्वामी अनिरुद्धाचार्य ने बातचीत में कहा कि देश के बंटवारे के समय मोहम्मद अली जिन्ना के साथ एक दलित नेता पाकिस्तान गए थे और उन्हें वहां का पहला कानून मंत्री बनाया गया था, उन्होंने लोगों से इस तथ्य को गूगल करने की बात भी कही उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मुसलमान दलितों के हितैषी हैं, तो फिर वह कानून मंत्री कुछ वर्षों बाद पाकिस्तान छोड़कर भारत क्यों लौट आए।
बांग्लादेश की घटना का हवाला:
अनिरुद्धाचार्य ने बांग्लादेश की एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां दीपू दास नामक व्यक्ति को जलाए जाने की घटना सामने आई, जिसे उन्होंने दलित समुदाय से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि अगर मुसलमान दलितों के शुभचिंतक हैं, तो ऐसी घटनाएं क्यों होती हैं।
मुसलमानों के बहिष्कार से किया इनकार:
कथावाचक ने स्पष्ट किया कि वे मुसलमानों के बहिष्कार के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारत में रसखान जैसे मुस्लिम व्यक्तित्वों को भी सम्मान दिया जाता है, उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू समाज मुसलमानों से नफरत नहीं करता, बल्कि हिंसा और नफरत की कथित विचारधाराओं का विरोध करता है, उन्होंने मुसलमानों से सवाल किया कि क्या वे कथित नरसंहार और हिंसक घटनाओं के समर्थक हैं, स्वामी अनिरुद्धाचार्य के इन बयानों के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है, कई लोग इसे व्यक्तिगत विचार बता रहे हैं, जबकि कुछ वर्गों ने इसे आपत्तिजनक करार दिया है।





