उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक सवाल बार-बार उठता है आखिर यूपी में ठाकुरों का सबसे बड़ा नेता कौन है? कोई इलाके का सिकंदर है, तो कोई पूरे प्रदेश में नाम का तूफान लेकिन जब बात बाहुबल, रसूख और सियासी पकड़ की होती है, तो दो नाम सबसे ऊपर आते हैं बाहुबली बृजभूषण शरण सिंह और कुंडा के अजेय विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया। इन दिनों चर्चा इसलिए तेज है क्योंकि बृजभूषण सिंह की राष्ट्र कथा ने यूपी की राजनीति में एक अलग ही संदेश दे दिया।
नंदिनी निकेतन में ऐसा सियासी जमावड़ा लगा कि देखने वालों ने इसे बाहुबलियों का अखाड़ा तक कह दिया। बृजेश सिंह, धनंजय सिंह, सुशील सिंह, विनीत सिंह, एमएलसी प्रिंसु, मंत्री दिनेश सिंह, रविंद्र भाटी एक के बाद एक ठाकुर दिग्गज कथा में पहुंचे और रितेश्वर महाराज का आशीर्वाद लिया।लेकिन 1 जनवरी से 8 जनवरी तक एक नाम ऐसा रहा, जिस पर सबकी निगाहें टिकी थीं। वो नाम था राजा भैया। जी हां, वही राजा भैया, जिनका रुतबा ठाकुर समाज में इतना मजबूत माना जाता है कि कई लोग उसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी टक्कर का बताते हैं।
खबर है कि बृजभूषण सिंह की ओर से राजा भैया को बाकायदा निमंत्रण भेजा गया था, लेकिन इसके बावजूद राजा भैया कथा में नहीं पहुंचे।अब यहीं से शुरू होती है असली बहस। चौक-चौराहों से लेकर सियासी ड्रॉइंग रूम तक सवाल गूंज रहा है क्या राजा भैया जानबूझकर दूर रहे?या फिर दोनों के बीच “सबसे बड़ा ठाकुर नेता” बनने की अदृश्य जंग चल रही है?एक तरफ बृजभूषण सिंह जो 1991 से लगातार चुनाव जीतते और जितवाते आ रहे हैं। सिर्फ 1998 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। आज उनके पास तीन हेलीकॉप्टर, सौ से ज्यादा लग्जरी गाड़ियां, आलीशान कोठी और रोज़ का जलवा-जलाल है। देवीपाटन मंडल में उनका सिक्का चलता है। दूसरी तरफ राजा भैया जो 1993 से आज तक निर्दलीय अजेय हैं।
मंत्री भी बने, विधायक और सांसद भी बनवाए। सरकार गिराने और बनाने का रिकॉर्ड, और मुख्यमंत्री से टकराने का इतिहास सब उनके खाते में दर्ज है। भले ही उनका राजनीतिक दायरा दो विधानसभा तक सिमटा हो, लेकिन असर पूरे प्रदेश में महसूस किया जाता है। दोनों के रिश्ते अच्छे बताए जाते हैं, शौक भी एक जैसे महंगी गाड़ियां, करोड़ों के घोड़े, शाही अंदाज। तो फिर सवाल उठता है कि कुंडा और लखनऊ में रहते हुए भी राजा भैया नंदिनी निकेतन क्यों नहीं पहुंचे? कुछ लोग कहते हैं राजा भैया इन दिनों राष्ट्र और सनातन सुरक्षा के अपने मिशन में व्यस्त हैं। समर्थकों का दावा है व्यस्तता की वजह से वह नहीं आ पाए, इसलिए उनके करीबी और प्रिय भाई एमएलसी गोपाल जी ने बृजभूषण सिंह को जन्मदिन की बधाई दी। लेकिन दूसरा वर्ग कुछ और ही कहानी सुनाता है।उनका कहना है कि बृजभूषण सिंह के बढ़ते दबदबे से राजा भैया असहज हैं।
कुछ लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि एक यूट्यूबर के मंच से “हमसे बड़ा कोई नहीं आएगा” वाला बयान सुनकर राजा भैया ने अपना प्लान बदल लिया। वैसे राजा भैया सस्पेंस के मास्टर माने जाते हैं। इससे पहले उनके इलाके में हुई एक बड़ी कथा में भी उन्होंने आखिरी दिन एंट्री मारकर माहौल टाइट कर दिया था। तो क्या इस बार भी कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है? या फिर ये सिर्फ अफवाहों का शोर है? फिलहाल सवाल वही है क्या यूपी के दो सबसे बड़े ठाकुर नेताओं के बीच सच में नंबर वन बनने की जंग चल रही है?या फिर राजा भैया के कुछ अपने उसूल हैं, जिन पर वह समझौता नहीं करते?जवाब फिलहाल सिर्फ दो लोगों के पास है एक, बृजभूषण शरण सिंह और दूसरे, राजा भैया।


