लखनऊ।उत्तर प्रदेश में अपराध विवेचना को वैज्ञानिक और सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS), लखनऊ में आयोजित क्राइम सीन मैनेजमेंट प्रशिक्षण कोर्स का पहला बैच सफलतापूर्वक पूरा हो गया। कोर्स पूरा करने के बाद प्रदेश के 87 पुलिस अधिकारी अब फॉरेंसिक विशेषज्ञ के रूप में तैनाती के लिए तैयार हैं।
45 दिन तक चला विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम करीब 45 दिनों तक चला, जिसमें प्रदेश के विभिन्न कमिश्नरेट और जनपदों से आए आरक्षी से लेकर उप निरीक्षक रैंक तक के पुलिसकर्मियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान अपराध स्थल की सुरक्षा, साक्ष्य संकलन, वैज्ञानिक विश्लेषण और कानूनी प्रक्रियाओं की बारीकियों पर गहन अध्ययन कराया गया।
समापन सत्र में फॉरेंसिक और कानून के तालमेल पर जोर
कोर्स के समापन अवसर पर संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।उन्होंने कहा कि
अपराध विवेचना तभी सफल हो सकती है जब पुलिस का हर कदम कानून और फॉरेंसिक विज्ञान से जुड़ा हो। जी.के. गोस्वामी ने चेताया कि यदि जांच में कानूनी प्रक्रियाओं और वैज्ञानिक साक्ष्यों की अनदेखी की गई, तो न्यायालय में मामला कमजोर पड़ सकता है।
फॉरेंसिक एक्सपर्ट के रूप में बढ़ेगी जिम्मेदारी
डॉ. गोस्वामी ने कहा कि
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अब ये अधिकारी केवल पुलिसकर्मी नहीं, बल्कि फॉरेंसिक एक्सपर्ट की भूमिका में अपने-अपने जिलों में कार्य करेंगे।
उन्होंने अधिकारियों से अपने कार्य को ईमानदारी, सतर्कता और पेशेवर निष्ठा के साथ करने की अपील की।
सोशल मीडिया पर आंख मूंदकर भरोसा न करने की सलाह
डॉ.जी.के. गोस्वामी ने प्रशिक्षणार्थियों को यह भी आगाह किया कि
सोशल मीडिया आज भले ही सूचना का बड़ा माध्यम बन गया हो,
लेकिन बिना सत्यापन उस पर पूरी तरह निर्भर रहना खतरनाक साबित हो सकता है।उन्होंने वैज्ञानिक साक्ष्यों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागी सम्मानित
प्रशिक्षण के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले परीक्षित शर्मा, रोहित कुमार और मिंटू तोमर को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
इसके साथ ही सभी 87 प्रतिभागियों को कर्तव्य और निष्पक्षता की शपथ दिलाकर विदा किया गया।
यूपीएसआईएफएस प्रशिक्षण को फील्ड में लागू करने की उम्मीद
संस्थान के उप निदेशक जितेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि
यह कोर्स पुलिस अधिकारियों को फील्ड में वैज्ञानिक विवेचना के लिए सक्षम बनाएगा।
उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशिक्षण में सीखी गई तकनीकों का प्रयोग कर
अधिक से अधिक मामलों में पीड़ितों को न्याय दिलाया जा सकेगा।
कार्यक्रम में कई विशेषज्ञ रहे मौजूद
समापन कार्यक्रम में फॉरेंसिक विशेषज्ञ, संस्थान के अधिकारी, प्रशिक्षक और तकनीकी स्टाफ उपस्थित रहा। कार्यक्रम का संचालन जनसंपर्क अधिकारी संतोष तिवारी ने किया।






