उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने की दिशा में पहल तेज होती नजर आ रही है। राज्य के 25वें स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस विषय को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद अब संत समाज से भी इस दिशा में समर्थन सामने आ रहा है।
देहरादून पहुंचे गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज ने उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग तीर्थाटन और पर्यटन के उद्देश्य से आते हैं, लेकिन इन दोनों विषयों के बीच स्पष्ट अंतर को समझना और लागू करना बेहद जरूरी है।
ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि पर्यटन जहां भौतिक सुविधाओं और मनोरंजन से जुड़ा है, वहीं तीर्थाटन और अध्यात्म व्यक्ति के आत्मिक विकास से संबंधित है। अब देश का शीर्ष नेतृत्व भी इस अंतर को समझने लगा है और अध्यात्म के महत्व को स्वीकार कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार को पर्यटन स्थलों के विकास के साथ-साथ वहां निहित आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों को भी बढ़ावा देना चाहिए। इससे न केवल उत्तराखंड की आध्यात्मिक पहचान मजबूत होगी, बल्कि विश्व पटल पर राज्य को एक नई पहचान भी मिलेगी।


