लखनऊ। उत्तर प्रदेश वन निगम में करोड़ों रुपये के बड़े वित्तीय घोटाले का सनसनीखेज मामला सामने आया है। निगम के प्रबंध निदेशक अरविंद सिंह ने बैंक ऑफ इंडिया की सदर शाखा के अज्ञात कर्मचारियों पर फर्जी एफडी के जरिए विभाग के 64.82 करोड़ रुपये हड़पने का गंभीर आरोप लगाते हुए गाजीपुर थाने में धोखाधड़ी, जालसाजी और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में हेरफेर का मुकदमा दर्ज कराया है।
निविदा प्रक्रिया के बाद भी रकम गायब
प्रबंध निदेशक के अनुसार, वन निगम की 64.82 करोड़ रुपये की एफडी बैंक ऑफ महाराष्ट्र में परिपक्व होने के बाद दोबारा निवेश के लिए 29 दिसंबर 2025 को विभिन्न बैंकों से प्रस्ताव मांगे गए थे। 30 दिसंबर को समिति के सामने निविदाएं खोली गईं, जिसमें बैंक ऑफ इंडिया सदर शाखा ने 6.73 प्रतिशत की सबसे अधिक ब्याज दर दी।
इसके बाद बैंक ऑफ इंडिया को एक साल के लिए 64.82 करोड़ रुपये की एफडी करने के निर्देश दिए गए। लेकिन यहीं से पूरे मामले में गड़बड़ी शुरू हो गई।
एफडी की रकम में चौंकाने वाला खेल
जब पांच जनवरी को निगम के सहायक लेखाकार ने एफडी की मूल रसीद मांगी, तो बैंक कर्मी द्वारा दी गई रसीद केवल 6.82 करोड़ रुपये की निकली। इस पर निगम ने तुरंत बैंक से स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिला।
सात जनवरी को बैंक की ओर से भेजे गए पत्र ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। पत्र में स्वीकार किया गया कि 64.82 करोड़ की जगह सिर्फ 6.82 करोड़ रुपये की एफडी, वह भी कम ब्याज दर (6.25%) पर की गई है।
फर्जी खाता और इलेक्ट्रॉनिक हेरफेर का आरोप
वन निगम ने आरोप लगाया है कि करोड़ों रुपये को फर्जी तरीके से दूसरे खाते में ट्रांसफर किया गया और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों में जानबूझकर हेरफेर किया गया। यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित आर्थिक अपराध की ओर इशारा करता है।
पुलिस जांच में जुटी, बैंक की चुप्पी
एसीपी गाजीपुर ने बताया कि बैंक और वन निगम से संबंधित सभी दस्तावेज तलब किए गए हैं और उनके आधार पर जांच आगे बढ़ेगी। वहीं बैंक ऑफ इंडिया के ऑपरेशन हेड से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, जिससे संदेह और गहरा गया है।
बड़ा सवाल: करोड़ों का जिम्मेदार कौन?
सरकारी धन के साथ इस तरह का खेल न सिर्फ बैंकिंग सिस्टम बल्कि वित्तीय सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में किन बड़े नामों का खुलासा होता है और करोड़ों की इस हेराफेरी पर कब तक कार्रवाई होती है।




