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अमेठी मे 27 वर्षों से ‘सीताराम’ लिख रहे बुजुर्ग रामचंद्र, बने सच्ची श्रद्धा की मिसाल

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सच्ची श्रद्धा बड़े साधनों की मोहताज नहीं होती—इस कथन को अमेठी के बुजुर्ग रामचंद्र ने अपने जीवन से साकार कर दिखाया है। राम मंदिर निर्माण के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर अमेठी से सामने आई यह कहानी आस्था और विश्वास की एक अनोखी मिसाल पेश करती है।

गोमती नदी के किनारे स्थित निज़ामुद्दीनपुर गांव के निवासी रामचंद्र बीते 27 वर्षों से लगातार ‘सीताराम’ नाम का लेखन कर रहे हैं। अब तक वे 60 लाख से अधिक बार ‘सीताराम’ लिख चुके हैं, जो पूरे क्षेत्र में श्रद्धा और आस्था का विषय बन चुका है। खेती-बाड़ी और गृहस्थी की जिम्मेदारियां निभाने के बाद रामचंद्र प्रतिदिन समय निकालकर राम नाम लेखन करते हैं। उनकी दिनचर्या में हर वर्ष औसतन 2 लाख 21 हजार बार ‘सीताराम’ लिखना शामिल है, जो उनकी अटूट आस्था को दर्शाता है।

श्रद्धा का एक और विशेष पहलू यह है कि हर वर्ष महाशिवरात्रि के दिन रामचंद्र अयोध्या पहुंचकर सरयू नदी में अपने द्वारा लिखी गई ‘सीताराम’ की कापियों का विधिवत विसर्जन करते हैं।
अमेठी के इस साधारण से बुजुर्ग की असाधारण भक्ति आज न केवल क्षेत्र बल्कि समाज के लिए भी सच्ची श्रद्धा और समर्पण की प्रेरणादायक कहानी बन चुकी है।

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