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यूपी की सियासत में बड़ा उलटफेर, सपा छोड़ बसपा में शामिल हुए मुस्लिम नेता

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बाराबंकी में सपा को बड़ा झटका, कद्दावर मुस्लिम नेता हफीज भारती ने छोड़ी पार्टी, बसपा में की घर वापसी

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी जिले में समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। सपा के वरिष्ठ नेता और नगर पालिका परिषद बाराबंकी के पूर्व अध्यक्ष हफीज भारती ने पार्टी से इस्तीफा देने के बाद अब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में वापसी कर ली है।

बुधवार, 28 जनवरी को सपा छोड़ने के बाद हफीज भारती ने लखनऊ में बसपा सुप्रीमो मायावती से मुलाकात की। इसके बाद बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने उन्हें औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता दिलाई, इस मौके पर उनके साथ सैकड़ों समर्थक भी मौजूद रहे।

अखिलेश यादव के लिए क्यों माना जा रहा है बड़ा झटका?

हफीज भारती सपा के प्रदेश सचिव रह चुके हैं और बाराबंकी की राजनीति में एक मजबूत पकड़ रखते हैं, आगामी चुनावों से पहले उनका पार्टी छोड़ना सपा प्रमुख अखिलेश यादव के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, खासतौर पर तब जब पार्टी मुस्लिम-यादव (M-Y) समीकरण को साधने की कोशिश कर रही है।

अल्पसंख्यक समुदाय में मजबूत पकड़

हफीज भारती बाराबंकी नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष रह चुके हैं और अल्पसंख्यक समुदाय में उनकी गहरी पैठ मानी जाती है, वे पहले स्थानीय निकाय चुनाव में सपा के टिकट पर एमएलसी प्रत्याशी भी रह चुके हैं, जिससे उनके राजनीतिक कद और प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।

2027 की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही बसपा में वापसी

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हफीज भारती की बसपा में वापसी को 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, कयास लगाए जा रहे हैं कि बसपा उन्हें जिले की किसी अहम सीट से चुनावी मैदान में उतार सकती है, हालांकि इस पर पार्टी की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

“बसपा में आना मेरी सच्ची घर वापसी” – हफीज भारती

बसपा में शामिल होने के बाद हफीज भारती ने कहा कि, “बसपा मेरी पुरानी पार्टी है और इसमें आना मेरी सच्ची घर वापसी है,” उनके इस कदम से जहां सपा के M-Y फैक्टर को नुकसान पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, वहीं बसपा को एक अनुभवी और जनाधार वाला नेता मिल गया है।

फिलहाल चुनाव नहीं, संगठन मजबूत करने पर फोकस

हालांकि, हफीज भारती ने साफ किया है कि वे फिलहाल कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे। उनका कहना है कि वे संगठन में रहकर काम करेंगे और पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर ध्यान देंगे, बाराबंकी की राजनीति में हफीज भारती का यह कदम आने वाले समय में नए सियासी समीकरण बना सकता है, जहां सपा के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है, वहीं बसपा इसे 2027 की तैयारी की दिशा में एक अहम कदम के तौर पर देख रही है।

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