उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव 2026 को लेकर इस समय जबरदस्त असमंजस और राजनीतिक हलचल का माहौल बना हुआ है। सत्ता के गलियारों से लेकर गांव की चौपालों तक यही सवाल गूंज रहा है कि क्या पंचायत चुनाव तय समय पर होंगे या फिर इन्हें टाल दिया जाएगा। इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर का एक बड़ा बयान सामने आया है, जिसने इस पूरे मुद्दे को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है। ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया है कि पंचायत चुनाव तय समय पर ही कराए जाएंगे और सरकार इसकी तैयारियों में तेजी से जुटी हुई है। उनका कहना है कि 15 अप्रैल तक पंचायत चुनाव की वोटर लिस्ट जारी कर दी जाएगी, जिसके बाद चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। राजभर के मुताबिक संबंधित विभाग चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप देने में लगा हुआ है और किसी भी स्थिति में चुनाव को टालने का सवाल नहीं उठता।
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हालांकि जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयान कर रहे हैं। तकनीकी तौर पर देखा जाए तो प्रदेश के ग्राम प्रधानों और बीडीसी सदस्यों का कार्यकाल मई 2026 में समाप्त हो रहा है। नियम के मुताबिक इससे पहले ही नए प्रतिनिधियों के चुनाव हो जाने चाहिए। लेकिन सबसे बड़ी अड़चन ओबीसी आरक्षण को लेकर सामने आ रही है। अभी तक राज्य में वह ओबीसी आयोग गठित ही नहीं किया गया है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर पंचायत चुनावों में आरक्षण का रोस्टर तय होना है। राजनीतिक विश्लेषकों और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि बिना ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और आरक्षण प्रक्रिया पूरी किए पंचायत चुनाव कराना लगभग असंभव है। ऐसे में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या सरकार जल्दबाजी में आयोग बनाकर प्रक्रिया पूरी करेगी या फिर चुनाव को आगे खिसकाने का फैसला लिया जाएगा। इसके साथ ही एक और बड़ा राजनीतिक पहलू भी सामने आ रहा है। अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में सत्ता पक्ष के भीतर ही कुछ लोग यह मानते हैं कि पंचायत चुनावों को टालना राजनीतिक रूप से ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। क्योंकि पंचायत चुनावों में टिकट और आरक्षण को लेकर स्थानीय स्तर पर अक्सर नाराजगी और बगावत देखने को मिलती है, जिसका असर सीधे विधानसभा चुनावों पर पड़ सकता है। ऐसे में फिलहाल स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ सरकार के मंत्री समय पर चुनाव कराने का दावा कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रशासनिक और कानूनी पेच इस प्रक्रिया को मुश्किल बनाते दिख रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में सरकार ओबीसी आयोग के गठन और आरक्षण प्रक्रिया को लेकर क्या फैसला लेती है, क्योंकि उसी पर तय होगा कि 2026 के पंचायत चुनाव समय पर होंगे या फिर प्रदेश की सियासत में एक और बड़ा मोड़ देखने को मिलेगा।


