उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर नमाज बनाम कानून का मुद्दा गरमा गया है। एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ साफ कह चुके हैं कि सड़कों पर नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी, वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम उपदेशक सैय्यद अयूब ने खुली चुनौती देकर माहौल को और गर्म कर दिया है।
सवाल यह है कि क्या कानून का पालन होगा या फिर बयानबाजी से विवाद और बढ़ेगा? हैदराबाद के मुस्लिम उपदेशक सैय्यद अयूब का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सीधी चुनौती दी है। वीडियो में अयूब कहते नजर आ रहे हैं कि अगर मस्जिदों में जगह कम पड़ेगी तो मुसलमान सड़कों पर नमाज पढ़ेंगे और अगर किसी में हिम्मत है तो रोक कर दिखाए। उन्होंने आरोप लगाया कि योगी सरकार मुसलमानों के धार्मिक अधिकारों पर रोक लगाने की कोशिश कर रही है। अयूब ने यह भी कहा कि जब सड़कों पर दूसरे धार्मिक कार्यक्रम होते हैं तो नमाज पर ही आपत्ति क्यों उठाई जाती है।

हालांकि उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कई लोगों ने उनके बयान को उकसाने वाला बताया है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सार्वजनिक सड़कों पर किसी भी धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी, चाहे वह किसी भी धर्म से जुड़ी क्यों न हो। उनका कहना है कि सड़क आम जनता के आवागमन के लिए होती है और वहां धार्मिक आयोजन से ट्रैफिक और कानून व्यवस्था प्रभावित होती है। ईद को देखते हुए प्रशासन भी अलर्ट मोड में है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है और सबकी नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।






