उत्तर प्रदेश की सियासत में इस वक्त “गौ रक्षा” का मुद्दा फिर से गर्म हो गया है। एक तरफ मथुरा में गौ रक्षक संत चंद्रशेखर उर्फ “फरसा वाले बाबा” की मौत के बाद सड़कों पर गुस्सा फूट पड़ा है, तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक पुराना बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि “गौ रक्षा के नाम पर कुछ लोगों ने अपनी दुकानें खोल रखी हैं।” यही बयान अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि जिस विचारधारा ने गौ रक्षा, राष्ट्रवाद और सनातन मूल्यों को अपनी राजनीति का अहम हिस्सा बनाया, उसी के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से ऐसे बयान क्यों दिए गए। हालांकि भाजपा समर्थक इसे संदर्भ से काटकर वायरल किया गया वीडियो बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश में है।
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मथुरा में फरसा वाले बाबा की मौत के बाद हालात तब और तनावपूर्ण हो गए जब उनके समर्थक सड़कों पर उतर आए। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की खबरें सामने आईं, आंसू गैस के गोले छोड़े गए और कई लोगों को हिरासत में लिया गया। इस घटना ने कानून व्यवस्था और गौ रक्षा दोनों मुद्दों को एक साथ चर्चा में ला दिया है। इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख दिखाते हुए साफ कहा है कि इस हत्याकांड में शामिल किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिए कि गौ रक्षा के नाम पर अराजकता फैलाने वालों पर भी कार्रवाई होगी। धार्मिक संत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का गाय को राष्ट्र माता घोषित करने का अभियान भी इस बहस को और तेज कर रहा है। यानी एक तरफ धार्मिक भावनाएं उफान पर हैं, तो दूसरी तरफ राजनीतिक बयानबाजी ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है।कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश में गाय अब सिर्फ आस्था का विषय नहीं बल्कि सियासत का भी बड़ा केंद्र बन चुकी है। 2027 के चुनाव से पहले ऐसे मुद्दों का असर कितना गहरा होगा, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन फिलहाल इतना तय है कि गौ रक्षा का मुद्दा फिर से राजनीतिक गलियारों में बड़ा विमर्श बन चुका है।






