डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने हरदोई के सीएचसी संडीला के चिकित्सा अधीक्षक के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। अधीक्षक पर अनाधिकृत निजी अस्पतालों पर कार्रवाई में लापरवाही बरतने का आरोप है। डिप्टी सीएम के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया और कछौना क्षेत्र में करीब 12 निजी अस्पतालों को सील कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार, डॉ. मनोज सिंह लेवल-1 के चिकित्सा अधिकारी हैं, जिनका ग्रेड पे 5400 है। वह बहेंदर और अहिरोरी में चिकित्सा अधीक्षक रह चुके हैं और वर्तमान में 30 नवंबर 2024 से सीएचसी संडीला के चिकित्सा अधीक्षक पद पर तैनात हैं।
उनके पास पीसीपीएनडीटी और एफआरयू का अतिरिक्त कार्यभार भी है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित निजी अस्पतालों पर कार्रवाई करने में उन्होंने लापरवाही बरती।
डॉ. मनोज के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश
उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि डॉ. मनोज सिंह के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। साथ ही उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी भवनाथ पांडेय से भी स्पष्टीकरण मांगा है कि जिले में वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (लेवल-3, ग्रेड पे 7600) उपलब्ध होने के बावजूद लेवल-1 अधिकारी को चिकित्सा अधीक्षक का कार्यभार क्यों सौंपा गया।
चार सदस्यीय जांच समिति गठित
निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है। इसमें एसीएमओ डॉ. अरविंद सचान को नोडल अधिकारी बनाया गया है, जबकि डॉ. हेमंत राजपूत, डॉ. अखिलेश बाजपेई और डॉ. मनोज सिंह को सदस्य बनाया गया है।
उपमुख्यमंत्री के आदेश के बाद डॉ. अरविंद सचान और टीम ने कछौना क्षेत्र में अभियान चलाया। जांच के दौरान आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत न कर पाने पर करीब एक दर्जन निजी अस्पतालों को सील कर दिया गया। अस्पताल संचालकों को तीन दिन के भीतर आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को सीएचसी कछौना भेजा गया है।
संडीला लेकिन यह सवाल यह भी उड़ता है खुलेआम अस्पताल चल रहे हैं धड़ल्ले से किसके संरक्षण में चल रहे हैं शिकायत करने के बाद भी मनोज नूडल अधिकारी मिली भगत से चल रहा है अस्पताल कृष्णा हॉस्पिटल पर भी नहीं हुई अभी तक की कोई कार्रवाई हर अस्पतालों से मोटा पैसा दिया जाता है






