जौनपुर की धरती पर जो हुआ, वो महज गुलाल उड़ाने का जलसा नहीं था, बल्कि वो ‘सियासी बारूद’ की गूँज थी जिसकी धमक लखनऊ तक सुनाई दी है। TD इंटर कॉलेज का मैदान गवाह बना एक ऐसे मंजर का, जिसने 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए बिसात अभी से बिछा दी है। इसे ‘होली मिलन’ कहना तो सिर्फ एक बहाना था, असल में यह पूर्वांचल का महाशक्ति प्रदर्शन था।
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मंच की तस्वीर देखिए और रसूख का अंदाजा लगाइए। एक तरफ धनंजय सिंह की जमीनी पकड़, दूसरी तरफदब दबा वाले भईया बृजभूषण शरण सिंह का बेबाक अंदाज, साथ में हरेंद्र सिंह का अनुभव और बृजेश सिंह ‘प्रिंसू’ की युवा सियासत। जब ये चेहरे एक साथ मुस्कुराते हुए कैमरे के सामने आए, तो विरोधियों के माथे पर पसीना आना लाजमी है। यह हाथ मिलाना महज औपचारिकता नहीं, बल्कि एक ‘पावर सिंडिकेट’ का उदय है। मंच से जब क्षत्रिय एकता और स्वाभिमान की हुंकार भरी गई, तो संदेश साफ था— “हमें नजरअंदाज करना अब मुमकिन नहीं।” * वर्चस्व की जंग: यह आयोजन बता रहा है कि पूर्वांचल की राजनीति अब सिर्फ बंद कमरों में नहीं, बल्कि खुले मैदानों में ताकत दिखाकर तय होगी। 2027 का ट्रेलर: यह ‘पिक्चर’ अभी बाकी है, लेकिन ट्रेलर ने बता दिया है कि आने वाले चुनाव में जातीय गोलबंदी और दिग्गजों का साथ आना बड़े-बड़े समीकरणों को ध्वस्त कर सकता है। जौनपुर से उठी यह लहर अगर परवान चढ़ी, तो पूर्वांचल की दर्जनों सीटों पर हार-जीत का फैसला यही ‘मंच’ करेगा। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि क्या यह एकता सिर्फ एक वर्ग तक सीमित है? शायद नहीं। यह एक चेतावनी है उन राजनीतिक दलों के लिए जो पूर्वांचल को अपनी जागीर समझते हैं। यह मंच चीख-चीख कर कह रहा है कि यहाँ की सियासत का रिमोट कंट्रोल अब इन दिग्गजों के हाथ में एकजुट होने जा रहा है। “सियासत में कोई भी कदम बिना मकसद के नहीं उठता, और जौनपुर का यह ‘शक्ति संगम’ तो सीधा 2027 की कुर्सी पर निशाना है।”इसी मंच से बृजभूषण ने सीना ठोक कर ललकार कहा कि दब दबा था दबा है और रहेगा ,,आगे उन्होंने ने कहा अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर एकता को मजबूती प्रदान करें






