नेपाल सरकार ने भारत से खरीदारी करने वाले लोगों के लिए नियम कड़े कर दिए हैं। अब 100 रुपये से अधिक के सामान पर भंसार (कस्टम ड्यूटी) देना अनिवार्य होगा, जिस पर 5% से लेकर 80% तक शुल्क लगाया जा सकता है। इस कदम का उद्देश्य नेपाल में घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देना बताया जा रहा है।

भारत-नेपाल सीमा पर होने वाला छोटा-मोटा व्यापार हमेशा से स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ा रहा है। ऐसे में इस नए नियम का सीधा असर सीमावर्ती इलाकों की खरीदारी और छोटे कारोबारियों पर पड़ने की आशंका है। खासकर भारतीय बाजारों पर निर्भर लोगों और व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। नेपाल में Balendra Shah के नेतृत्व वाले प्रशासन के इस फैसले के बाद सीमा क्षेत्रों में हलचल तेज हो गई है। इस आदेश में किसी भी NGO या सरकारी संस्था को कोई छूट नहीं दी गई है।

स्थानीय प्रशासन लाउडस्पीकर के जरिए लोगों को इस नियम की जानकारी दे रहा है। सीमा से सटे इलाकों में रहने वाले लोग अक्सर भारत के बाजारों से सस्ता सामान जैसे दाल, तेल, नमक, चीनी, सब्जियां और दवाइयां खरीदते हैं। अब इस नियम से उनकी छोटी-छोटी खरीदारी भी प्रभावित होगी स्थानीय लोगों का कहना है कि इसका सबसे ज्यादा असर गरीब, मजदूर और दिहाड़ी पर निर्भर परिवारों पर पड़ेगा, जो रोजाना 200-300 रुपये का सामान खरीदकर गुजारा करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का मकसद भले ही राजस्व बढ़ाना और अवैध व्यापार पर रोक लगाना हो, लेकिन इसका बोझ आम लोगों और छोटे व्यापारियों पर ज्यादा पड़ेगा, जबकि बड़ी कंपनियां इससे कम प्रभावित होंगी। फिलहाल सीमा पर स्थित छोटी भंसार सेवाओं पर स्थिति सामान्य है और अधिकारियों को अभी उच्च स्तर से स्पष्ट निर्देश का इंतजार है। निर्देश मिलने के बाद नियमों को सख्ती से लागू किया जाएगा।

इसके अलावा, नेपाल में भारतीय नंबर प्लेट वाले वाहनों के लिए भी सख्त नियम लागू कर दिए गए हैं। अब नेपाल में प्रवेश के लिए कस्टम अनुमति लेना जरूरी होगा। नियमों के तहत दोपहिया वाहनों पर 100 रुपये, तीन पहिया पर 400 रुपये और कार-जीप-वैन पर 600 रुपये प्रतिदिन शुल्क देना होगा। भुगतान के बाद भी कोई विदेशी वाहन एक आर्थिक वर्ष में अधिकतम 30 दिन ही नेपाल में चल सकता है। तय सीमा से अधिक रहने पर दोपहिया पर 2000 रुपये और अन्य वाहनों पर 2500 रुपये प्रतिदिन अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा।






