बिहार की राजनीति में आज होने वाले कैबिनेट विस्तार से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के मंत्रिमंडल में शामिल होने की चर्चाओं ने राज्य में परिवारवाद की बहस को फिर हवा दे दी है। इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल ने सरकार पर तीखा हमला बोला है और नीतीश कुमार के पुराने बयानों को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
कैबिनेट विस्तार को लेकर पिछले कई दिनों से अटकलें चल रही थीं, लेकिन जैसे ही निशांत कुमार के मंत्री बनने की खबरें सामने आईं, विपक्ष ने इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया। आरजेडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए जेडीयू और नीतीश कुमार पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।आरजेडी की ओर से शेयर किए गए पोस्टर में लिखा गया, “जब पिताजी ही पिछले दरवाजे से सत्ता सुख भोगते रहे, तो बेटाजी कैसे जनता का सामना कर पाते।” पार्टी ने तंज कसते हुए कहा कि जो नेता वर्षों तक परिवारवाद के खिलाफ भाषण देते रहे, अब वही अपने बेटे को राजनीति में स्थापित करने में जुटे हैं।
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पोस्ट में आगे लिखा गया कि “पिता ने आजीवन परिवारवाद पर लेक्चर देने के बाद अपने बेटे को राजनीति में सेट करने की शर्त पर ही कुर्सी छोड़ी।” आरजेडी ने निशांत कुमार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने “जनता के बीच जाने के बजाय सीधे सत्ता के रास्ते को चुना।”
दरअसल, लंबे समय तक राजनीति से दूरी बनाए रखने वाले निशांत कुमार ने 8 मार्च 2026 को आधिकारिक रूप से जनता दल यूनाइटेड की सदस्यता ग्रहण की थी। इसके बाद से ही उनके सक्रिय राजनीति में आने की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। हालांकि शुरुआती दौर में कहा जा रहा था कि उन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारी दी जाएगी और वे कैबिनेट का हिस्सा नहीं बनेंगे। लेकिन अब मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की खबरों ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है।
इस पूरे मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने निशांत कुमार का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि अगर दूसरे राजनीतिक परिवारों के सदस्य मंत्री बन सकते हैं, तो निशांत कुमार के मंत्री बनने पर सवाल उठाना गलत है। मांझी ने कहा, “क्या निशांत कुमार बिहार के नागरिक नहीं हैं? क्या वे कार्यकर्ता नहीं हैं? अगर वह मंत्री बनते हैं तो इसमें दिक्कत क्या है?”
उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को राजनीति में आने और जिम्मेदारी संभालने का अधिकार है। मांझी के बयान को जेडीयू और एनडीए खेमे की तरफ से समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि निशांत कुमार की एंट्री केवल एक कैबिनेट विस्तार नहीं, बल्कि जेडीयू की भविष्य की राजनीति का संकेत भी हो सकती है। लंबे समय से यह सवाल उठता रहा है कि नीतीश कुमार के बाद पार्टी की कमान किसके हाथ में जाएगी। ऐसे में निशांत कुमार की सक्रियता को उत्तराधिकारी की तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है।
फिलहाल बिहार की राजनीति में परिवारवाद बनाम राजनीतिक अधिकार की बहस तेज हो चुकी है। अब सभी की नजर कैबिनेट विस्तार और उसमें शामिल होने वाले चेहरों पर टिकी हुई है, क्योंकि यह फैसला आने वाले समय की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है।






