उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी घमासान तेज हो गया है। इस बार मामला एक दलित युवती और उसके परिवार से जुड़ा है, जिसने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के सामने भावुक होकर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। युवती का दावा है कि सिर्फ अखिलेश यादव को अपने घर के भंडारे में पूड़ी खिलाने की वजह से उसके पिता को नौकरी में प्रताड़ित किया गया और डिमोट कर दिया गया।
यह मामला उस समय चर्चा में आया जब बुधवार को युवती अचानक सपा मुख्यालय पहुंची, जहां अखिलेश यादव प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। इसी दौरान युवती भावुक हो गई और उसने कहा, “सर, मैं भाजपा की धांधली दिखाना चाहती हूं। नौकरी की बात नहीं है… आपके लिए ऐसी 100 नौकरियां कुर्बान हैं।” युवती की बात सुनकर वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए।
दरअसल पूरा मामला 14 अप्रैल, 2026 का बताया जा रहा है। बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती के मौके पर लखनऊ निवासी अंजलि मैसी ने अपने घर पर भंडारे का आयोजन किया था। उसी दिन बैसाखी पर्व के अवसर पर अखिलेश यादव सदर गुरुद्वारा में माथा टेकने पहुंचे थे। गुरुद्वारे से लौटते समय अंजलि ने उनसे प्रसाद ग्रहण करने का आग्रह किया, जिसके बाद अखिलेश यादव गाड़ी से उतरकर भंडारे में शामिल हुए और पूड़ी-सब्जी खाई।
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इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ था। वीडियो में अंजलि खुशी जाहिर करते हुए कहती दिखाई दी थीं कि “आप हमारे सबसे अच्छे नेता हैं, हम चाहते हैं कि आपकी सरकार आए।” इस पर अखिलेश यादव ने भी उनका धन्यवाद किया था।
अब अंजलि का आरोप है कि इस घटना के अगले ही दिन उनके पिता उमेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई कर दी गई। अंजलि के मुताबिक उनके पिता छावनी परिषद में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत थे, लेकिन बिना किसी स्पष्ट कारण के उन्हें डिमोट कर सफाई कर्मचारी का काम सौंप दिया गया।
अंजलि ने सपा मुख्यालय में कहा कि उनके पिता ने उन्हें संदेश देने को कहा है कि “आपके लिए ऐसी 100 नौकरियां कुर्बान हैं।” इस पर अखिलेश यादव ने भरोसा दिलाया कि वह अधिकारियों से इस मामले में बात करेंगे।
बाद में अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि “पीडीए समाज की एक महिला के पिता को सिर्फ इसलिए प्रताड़ित किया जा रहा है क्योंकि हमने बाबासाहेब जयंती पर उनकी बेटी के यहां पूड़ी खा ली थी।” उन्होंने भाजपा सरकार पर दलित और पिछड़े वर्गों के खिलाफ राजनीति करने का आरोप लगाया।
हालांकि दूसरी तरफ छावनी परिषद प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज किया है। अधिकारियों का कहना है कि उमेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई राजनीतिक कारणों से नहीं, बल्कि सेवा नियमों के उल्लंघन की वजह से की गई। परिषद के अनुसार उमेश कुमार ने बिना अनुमति रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को भंडारे का निमंत्रण भेजा था, जो सेवा आचरण नियमों के खिलाफ माना गया।
प्रशासन का कहना है कि विभागीय व्यवस्था के तहत उन्हें दूसरी जिम्मेदारी सौंपी गई है। फिलहाल यह मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है और भाजपा-सपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का नया मुद्दा बन गया है।






