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चंदौली में 24 घंटे का खूनी खेल: पूर्व सैनिक बना ‘साइको किलर’, 3 हत्याओं के बाद पुलिस एनकाउंटर में ढेर

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उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में बीते 24 घंटे में हुई सिलसिलेवार हत्याओं ने पूरे इलाके को दहला दिया, एक पूर्व सैनिक, जिसे पुलिस ने ‘साइको किलर’ बताया, ने ट्रेन से लेकर अस्पताल तक तीन लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी, आखिरकार आरोपी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया, इस सनसनीखेज घटनाक्रम ने सुरक्षा व्यवस्था, मानसिक स्वास्थ्य और हथियार लाइसेंस प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ट्रेन में शुरू हुआ मौत का खेल

पूरी वारदात की शुरुआत रविवार सुबह करीब 6:45 बजे हुई। डीडीयू-ताड़ीघाट पैसेंजर ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों के बीच अचानक गोलियों की आवाज गूंज उठी, आरोपी गुरप्रीत सिंह ने गाजीपुर निवासी 34 वर्षीय मंगरू को सिर में गोली मार दी, घटना के बाद ट्रेन में अफरा-तफरी मच गई, यात्री जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे, लेकिन आरोपी मौके से फरार हो गया।

दूसरी ट्रेन में फिर हत्या

पहली हत्या के कुछ घंटे बाद रविवार देर रात करीब 1:30 बजे जम्मूतवी एक्सप्रेस में आरोपी ने दूसरी वारदात को अंजाम दिया, इस बार बिहार के गया निवासी दिनेश साहू को निशाना बनाया गया, आरोपी ने उनके सिर में गोली मारी, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। लगातार दो ट्रेनों में हुई हत्याओं से रेलवे सुरक्षा एजेंसियां भी सकते में आ गईं।

अस्पताल में तीसरी हत्या

सोमवार सुबह करीब साढ़े छह बजे आरोपी अलीनगर थाना क्षेत्र के कमलापुर स्थित जीवक अस्पताल पहुंचा, यहां उसने इलाज कराने का बहाना बनाकर वार्ड में प्रवेश किया और बिहार निवासी 55 वर्षीय लक्ष्मीना देवी को सिर में गोली मार दी, अस्पताल परिसर में अचानक मची अफरा-तफरी के बीच स्थानीय लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। ग्रामीणों ने उसकी जमकर पिटाई की और बाद में पुलिस के हवाले कर दिया।

पूछताछ में कबूली तीनों हत्याएं

पुलिस पूछताछ में आरोपी गुरप्रीत सिंह ने तीनों हत्याओं की जिम्मेदारी स्वीकार कर ली, आरोपी पंजाब के अमृतसर का रहने वाला था और वर्ष 2021 में सेना की नौकरी छोड़ चुका था, वह बिहार के आरा में गार्ड की नौकरी कर रहा था, पुलिस के अनुसार उसके पास एक लाइसेंसी रिवॉल्वर और एक अवैध पिस्टल बरामद हुई, शुरुआती जांच में सामने आया कि वह शराब का आदी था और मानसिक रूप से अस्थिर भी बताया जा रहा था।

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क्राइम सीन रीक्रिएशन के दौरान एनकाउंटर

मामले में बड़ा मोड़ सोमवार देर रात आया, जब पुलिस आरोपी को लेकर क्राइम सीन रीक्रिएट कराने गई थी। इसी दौरान आरोपी ने एक पुलिसकर्मी की पिस्तौल छीनने की कोशिश की और फायरिंग कर दी, जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने उसे गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई, इस मुठभेड़ में दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।

कई बड़े सवाल छोड़ गया मामला

इस पूरी घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मानसिक रूप से अस्थिर बताए जा रहे व्यक्ति के पास लाइसेंसी हथियार कैसे था? ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों थी? घटना के समय आरपीएफ और जीआरपी की टीमें कहां थीं? क्या समय रहते आरोपी को रोका जा सकता था?

फिलहाल चंदौली पुलिस, आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त टीम मामले की गहन जांच कर रही है हालांकि, 24 घंटे के भीतर उजड़े तीन परिवारों का दर्द शायद लंबे समय तक लोगों के जहन में बना रहेगा।

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