लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सभी राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर रणनीति बनाने में जुट गए हैं। इसी बीच कांग्रेस और बसपा के संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। कहा जा रहा है कि कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए बसपा के साथ तालमेल की कवायद शुरू कर दी है।
इसी क्रम में कांग्रेस के अनुसूचित विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम, बाराबंकी सांसद तनुज पुनिया समेत कई कांग्रेस नेता बसपा प्रमुख मायावती से मुलाकात करने पहुंचे। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक बसपा प्रमुख मायावती ने कांग्रेस नेताओं से मुलाकात नहीं की।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस और बसपा के संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस मुलाकात को लेकर अलग सफाई दी गई है।
कांग्रेस की ओर से कहा गया कि बसपा प्रमुख मायावती देश की बड़ी दलित नेता हैं और पिछले कुछ समय से उनकी सक्रियता कम दिखाई दे रही है। इसी वजह से कांग्रेस के अनुसूचित विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम और सांसद तनुज पुनिया औपचारिक तौर पर उनका स्वास्थ्य हाल जानने पहुंचे थे।
कांग्रेस ने अपने बयान में कहा कि पार्टी संविधान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और 2024 लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में भाजपा को कड़ी चुनौती दी थी। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश में दलितों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़े हैं तथा भाजपा सरकार संविधान विरोधी राजनीति कर रही है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि समान विचारधारा वाले दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश आगे भी जारी रहेगी, ताकि प्रदेश से भाजपा सरकार को सत्ता से बाहर किया जा सके।






