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RJD में बढ़ी अंदरूनी कलह! प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल नाराज, पार्टी में गुटबाजी खुलकर आई सामने

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बिहार की प्रमुख विपक्षी पार्टी Rashtriya Janata Dal के भीतर इन दिनों सबकुछ सामान्य नहीं चल रहा है। पार्टी के अंदर बढ़ती गुटबाजी और नेताओं के बीच खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। सूत्रों के मुताबिक, आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल अपनी ही पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं के रवैये से बेहद नाराज चल रहे हैं। बताया जा रहा है कि संगठन से जुड़े कई अहम फैसले प्रदेश अध्यक्ष को भरोसे में लिए बिना किए जा रहे हैं, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ता जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, हाल के दिनों में कई बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों और आंदोलनों की रूपरेखा प्रदेश अध्यक्ष की जानकारी के बिना तय की गई। सबसे ज्यादा नाराजगी उस समय सामने आई, जब नीट पेपर लीक मामले को लेकर पटना में हुए विरोध प्रदर्शन की सूचना भी उन्हें पहले से नहीं दी गई। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस घटना के बाद से मंगनीलाल मंडल खुद को संगठन में कमजोर किए जाने की कोशिश महसूस कर रहे हैं।

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बताया जा रहा है कि विवाद की शुरुआत पार्टी कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक से हुई थी। यह बैठक नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav के आगामी दौरों और प्रोटोकॉल व्यवस्था को लेकर बुलाई गई थी। लेकिन बैठक के दौरान ही कई वरिष्ठ नेताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि वहां मौजूद नेता भी असहज नजर आए।

सूत्रों के मुताबिक, बैठक में नेताओं के बीच हुई नोकझोंक और आपसी टकराव से प्रदेश अध्यक्ष काफी नाराज हो गए। उन्हें लगा कि पार्टी के भीतर अनुशासन कमजोर हो रहा है और संगठनात्मक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी के बाद उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने का फैसला लिया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मंगनीलाल मंडल ने पांच वरिष्ठ नेताओं की एक हाई-लेवल कमेटी गठित की। इस कमेटी में उदय नारायण चौधरी, बीनू यादव, तनवीर हसन और रणविजय साहू जैसे नेताओं को शामिल किया गया। कमेटी को निर्देश दिया गया था कि वह तय समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष को सौंपे और पूरे विवाद की वजहों को स्पष्ट करे।

हालांकि तय समय बीत जाने के बाद भी कमेटी ने अपनी रिपोर्ट जमा नहीं की। इसे लेकर प्रदेश अध्यक्ष की नाराजगी और बढ़ गई है। अब उन्होंने दोबारा पत्र जारी कर कमेटी को 7 जून 2026 तक हर हाल में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। पार्टी के अंदर इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं कि यदि रिपोर्ट में बड़े नेताओं की भूमिका सामने आती है, तो संगठन में बड़ा बदलाव भी संभव है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले आरजेडी के भीतर बढ़ती गुटबाजी पार्टी के लिए चिंता का विषय बन सकती है। विपक्ष के तौर पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाने के बजाय यदि पार्टी के नेता आपसी विवादों में उलझे रहे, तो इसका असर संगठन और चुनावी तैयारियों पर भी पड़ सकता है।

हालांकि इस पूरे विवाद पर अभी तक आरजेडी नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी और अंदरूनी संघर्ष ने बिहार की राजनीति में नई चर्चाओं को जरूर हवा दे दी है।

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