लखनऊ की उस दोपहर में माहौल सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम का नहीं था, बल्कि एक ऐसे परिवार के दुख का था जिसने अपना एक प्रिय सदस्य खो दिया। हर आंख नम थी, हर चेहरा गमगीन। घर के आंगन में वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच शोक और संवेदना का एक गहरा सन्नाटा पसरा हुआ था।
25 मई को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपर्णा यादव के लखनऊ स्थित आवास पहुंचे। यहां स्वर्गीय प्रतीक यादव की आत्मा की शांति के लिए त्रयोदशी संस्कार कार्यक्रम आयोजित किया गया था। मुख्यमंत्री ने जैसे ही दिवंगत प्रतीक यादव के चित्र पर पुष्प अर्पित किए, वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। कुछ पल के मौन ने उस पीड़ा को और गहरा कर दिया, जिसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं था।श्रद्धांजलि सभा में परिवार के सदस्य, रिश्तेदार, करीबी मित्र और कई सामाजिक व राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहीं। हर कोई अपनों को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन किसी अपने को खोने का दर्द हर चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपर्णा बिष्ट से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने बेहद भावुक शब्दों में कहा कि किसी प्रियजन के जाने का दुख जीवन का सबसे कठिन सच होता है। ऐसे समय में पूरा समाज परिवार के साथ खड़ा रहता है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और परिवार को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
धार्मिक अनुष्ठानों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच वातावरण पूरी तरह श्रद्धा और शांति से भरा हुआ था। पंडितों द्वारा आत्मा की शांति के लिए विशेष पूजा-अर्चना की गई। परिवार ने नम आंखों से सभी धार्मिक विधियां पूरी कीं। ऐसा लग रहा था मानो हर मंत्र, हर प्रार्थना स्वर्गीय प्रतीक यादव की स्मृतियों को श्रद्धांजलि दे रही हो।मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जीवन और मृत्यु प्रकृति का अटल सत्य हैं, लेकिन अपनों की यादें कभी समाप्त नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय प्रतीक यादव की स्मृतियां हमेशा परिवार और उनके करीबियों के दिलों में जीवित रहेंगी।
राजनीतिक व्यस्तताओं के बीच मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत रूप से पहुंचना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि संवेदना और मानवीय रिश्तों की गहराई का संदेश था। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने एक बार फिर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और परिवार को धैर्य रखने का संदेश देकर वहां से विदा ली। उस क्षण पूरे वातावरण में बस एक ही भावना थी श्रद्धांजलि, संवेदना और अपनों की यादों का मौन दर्द।





