बिहार में जमीन से जुड़े विवाद, पुराने रिकॉर्ड की गड़बड़ियां और धीमी सर्वे प्रक्रिया से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री Samrat Choudhary की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बिहार कैबिनेट बैठक में भूमि सर्वे और बंदोबस्त प्रक्रिया को लेकर बड़ा निर्णय लिया गया। सरकार ने बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त (संशोधन) नियमावली 2026 को मंजूरी दे दी है। माना जा रहा है कि इस फैसले से राज्य में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी, सटीक और आधुनिक बनाया जा सकेगा।
सरकार के अनुसार, बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त अधिनियम 2011 के तहत पूरे राज्य में रैयती और अन्य प्रकार की जमीनों का नया अधिकार अभिलेख यानी खतियान और भू-मानचित्र तैयार किया जा रहा है। अब तक यह काम बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त नियमावली 2012 के तहत चल रहा था, लेकिन समय के साथ तकनीकी और प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए इसमें बदलाव आवश्यक माना गया।
इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने नई संशोधित नियमावली लागू करने का फैसला लिया है। राजस्व विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था से सर्वे प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, तेज और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जा सकेगा।
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नई नियमावली से क्या होंगे बड़े फायदे?
सरकार का दावा है कि नए नियम लागू होने के बाद भूमि सर्वेक्षण कार्य में ज्यादा शुद्धता और पारदर्शिता आएगी। इससे जमीन से जुड़े विवादों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
नई नियमावली में कई नए तकनीकी शब्द और प्रक्रियाएं जोड़ी गई हैं, जिससे नगर क्षेत्रों में विशेष भू-सर्वेक्षण का काम तेजी से पूरा किया जा सकेगा। इसके अलावा नए खतियान और भू-नक्शा तैयार करने की प्रक्रिया को भी अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाया जाएगा।
राजस्व विभाग के अधिकारियों का मानना है कि संशोधित नियमों के लागू होने से वर्षों से लंबित बंदोबस्ती और भू-अभिलेख संबंधी मामलों के निपटारे में तेजी आएगी। साथ ही डिजिटल और अपडेटेड रिकॉर्ड उपलब्ध होने से जमीन खरीद-बिक्री, दाखिल-खारिज और स्वामित्व विवाद जैसे मामलों में लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में जमीन विवाद लंबे समय से बड़ी समस्या रहे हैं। कई मामलों में पुराने कागजात, गलत रिकॉर्ड और अस्पष्ट नक्शों की वजह से लोगों को वर्षों तक कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में डिजिटल और पारदर्शी भूमि रिकॉर्ड व्यवस्था भविष्य में बड़ी राहत साबित हो सकती है।
कैबिनेट बैठक में सिर्फ भूमि सर्वे से जुड़े फैसले ही नहीं लिए गए, बल्कि कई अन्य अहम प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। इनमें कैशलेस इलाज व्यवस्था, नए विभागों का गठन, स्पेशल कोर्ट की स्थापना, PMCH में स्पाइन यूनिट और प्रशासनिक सुधार से जुड़े फैसले शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि उसका लक्ष्य प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना और आम लोगों तक सरकारी सेवाओं को तेजी और पारदर्शिता के साथ पहुंचाना है। वहीं भूमि सर्वे और बंदोबस्त प्रक्रिया में किया गया यह बदलाव आने वाले समय में बिहार के लाखों लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।






