उत्तर प्रदेश पुलिस को आखिरकार चार साल बाद अपना स्थायी मुखिया मिल गया है। 1991 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण को प्रदेश का नया पूर्णकालिक डीजीपी नियुक्त किया गया है। अपने 35 वर्षों से अधिक के पुलिस सेवा अनुभव में राजीव कृष्ण ने कानून-व्यवस्था, आतंकवाद विरोधी अभियान और पुलिस आधुनिकीकरण के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाई है। राजीव कृष्ण का नाम उन चुनिंदा अधिकारियों में शुमार है जिन्होंने फील्ड पुलिसिंग से लेकर प्रशासनिक जिम्मेदारियों तक हर स्तर पर अपनी कार्यकुशलता साबित की है। उन्होंने फिरोजाबाद, इटावा, मथुरा, बुलंदशहर, नोएडा और आगरा जैसे महत्वपूर्ण जिलों में पुलिस कप्तान के रूप में काम किया। इसके अलावा वे उत्तर प्रदेश के ऐसे अकेले आईपीएस अधिकारी हैं जिन्हें दो बार राजधानी लखनऊ का एसएसपी बनने का मौका मिला।
उनके करियर का सबसे अहम अध्याय उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड यानी एटीएस से जुड़ा रहा है। प्रदेश में आतंकी घटनाओं के बाद गठित एटीएस को आधुनिक तकनीक और मजबूत खुफिया नेटवर्क से लैस करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। यही वजह है कि उन्हें यूपी एटीएस को हाईटेक बनाने वाले अधिकारियों में गिना जाता है। राजीव कृष्ण ने केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति के दौरान बीएसएफ में भी सेवाएं दीं। वहीं मुरादाबाद पुलिस अकादमी, लखनऊ और आगरा जोन, विजिलेंस विभाग समेत कई अहम पदों पर रहते हुए उन्होंने प्रशासनिक नेतृत्व की मजबूत छाप छोड़ी। साल 2024 में पुलिस भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले के बाद सरकार ने भर्ती बोर्ड की जिम्मेदारी राजीव कृष्ण को सौंपी। उनके नेतृत्व में 60 हजार से अधिक पदों की भर्ती प्रक्रिया को सफलतापूर्वक और पारदर्शी तरीके से पूरा कराया गया, जिसकी व्यापक सराहना हुई।
31 मई को कार्यवाहक डीजीपी के रूप में जिम्मेदारी संभालने के बाद अब उन्हें प्रदेश का पूर्णकालिक डीजीपी नियुक्त कर दिया गया है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव, अपराध नियंत्रण, साइबर सुरक्षा, महिला सुरक्षा और पुलिस आधुनिकीकरण जैसी बड़ी चुनौतियों का जिम्मा अब उनके कंधों पर होगा। तकनीक, अनुशासन और प्रशासनिक दक्षता के लिए पहचाने जाने वाले राजीव कृष्ण के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पुलिस के नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि प्रदेश की सबसे बड़ी पुलिस फोर्स को वह किस नई दिशा में लेकर जाते हैं।






