Home Political news दिल्ली से लौटते ही योगी के दरबार पहुंचे पंकज चौधरी! यूपी बीजेपी...

दिल्ली से लौटते ही योगी के दरबार पहुंचे पंकज चौधरी! यूपी बीजेपी में क्या होने वाला है बड़ा खेल?

37
0

उत्तर प्रदेश बीजेपी में आखिर चल क्या रहा है? क्या दिल्ली और लखनऊ के बीच सत्ता का एक अदृश्य संघर्ष छिड़ चुका है? क्या 2027 के चुनाव से पहले यूपी बीजेपी में वर्चस्व की जंग अपने चरम पर पहुंच रही है? आखिर क्यों प्रदेश अध्यक्ष से लेकर डिप्टी सीएम तक बार-बार दिल्ली दरबार की हाजिरी लगा रहे हैं? और सबसे बड़ा सवाल… क्या उत्तर प्रदेश में एक ही सत्ता केंद्र रहेगा या फिर दिल्ली एक नया पावर सेंटर खड़ा करने की तैयारी में है? राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दिल्ली नेतृत्व के बीच संगठन और सत्ता के संतुलन को लेकर अंदरखाने खींचतान जारी है।

ALSO READ ब्राह्मणों के सबसे बड़े नेता बने योगी ! ब्राह्मण नेताओं ने कर दिया बड़ा ऐलान

एक तरफ योगी आदित्यनाथ हैं, जिनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और जो भाजपा के सबसे बड़े जनाधार वाले चेहरों में गिने जाते हैं। दूसरी तरफ संगठन की नई टीम को लेकर दिल्ली में लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। पंकज चौधरी, धर्मपाल सिंह और केशव प्रसाद मौर्य जैसे नेताओं का लगातार दिल्ली पहुंचना कई सवाल खड़े कर रहा है। आखिर ऐसा क्या है जिसके लिए बार-बार दिल्ली दरबार की चौखट पर हाजिरी लगानी पड़ रही है? आइए समझते हैं पूरी सियासी कहानी। उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय जितनी चर्चा विपक्ष की नहीं है, उससे कहीं ज्यादा चर्चा बीजेपी के अंदर चल रही गतिविधियों की हो रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक तरफ प्रदेश में कानून-व्यवस्था, अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और अपने सख्त प्रशासनिक फैसलों को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ भाजपा संगठन के भीतर की हलचल राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। बीते कुछ दिनों में घटनाक्रमों की एक लंबी श्रृंखला देखने को मिली है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह लगातार दिल्ली में डेरा डाले रहे। शीर्ष नेतृत्व के साथ कई दौर की बैठकों के बाद जब दोनों नेता लखनऊ लौटे तो सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करने पहुंचे। यह मुलाकात भी कोई औपचारिक मुलाकात नहीं थी बल्कि काफी लंबी चली। आधिकारिक तौर पर कहा गया कि चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को लेकर हुई। लेकिन राजनीतिक सूत्रों और विश्लेषकों का मानना है कि प्रदेश संगठन की नई टीम को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई है। दरअसल, यूपी बीजेपी में सबसे ज्यादा नजरें इस समय प्रदेश संगठन की नई कार्यकारिणी पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले जो संगठन खड़ा होगा, वही आगे टिकट वितरण, चुनावी रणनीति और राजनीतिक फैसलों में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा। यही कारण है कि राजनीतिक विश्लेषक इस पूरी कवायद को केवल संगठन विस्तार नहीं बल्कि भविष्य की शक्ति संरचना के रूप में देख रहे हैं। चर्चा यह भी है कि दिल्ली चाहती है कि प्रदेश संगठन में ऐसे चेहरे मजबूत हों जिन पर केंद्रीय नेतृत्व का भरोसा हो। वहीं दूसरी तरफ योगी आदित्यनाथ का अपना राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव पहले से ही मजबूत माना जाता है। यहीं से वर्चस्व और पावर सेंटर की बहस शुरू होती है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान योगी आदित्यनाथ एक बड़े जननेता के रूप में उभरे हैं। उनकी सभाओं में भीड़, कानून-व्यवस्था पर सख्त रुख, बुलडोजर कार्रवाई और हिंदुत्व की राजनीति ने उन्हें भाजपा के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल कर दिया है। ऐसे में स्वाभाविक रूप से संगठन और सरकार के बीच शक्ति संतुलन को लेकर चर्चाएं होती रहती हैं। इसी बीच एक और दिलचस्प घटनाक्रम हुआ। जैसे ही पंकज चौधरी और धर्मपाल सिंह दिल्ली से लौटकर योगी आदित्यनाथ से मिले, उसके कुछ समय बाद ही उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य दिल्ली पहुंच गए। वहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी भी साझा की। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर लगातार दिल्ली दौरे क्यों हो रहे हैं? तो बता दे कि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 का चुनाव केवल विपक्ष के खिलाफ लड़ाई नहीं है, बल्कि भाजपा के लिए अपने संगठन को और मजबूत करने की चुनौती भी है। क्योंकि जो संगठन पर मजबूत पकड़ बनाएगा, चुनावी रणनीति और टिकट वितरण में उसकी भूमिका भी उतनी ही प्रभावशाली होगी। इसीलिए प्रदेश संगठन की नई टीम को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि जिस टीम का गठन होगा, वही 2027 के चुनाव की आधारशिला रखेगी। बूथ स्तर से लेकर जिला और प्रदेश स्तर तक संगठन ही चुनावी मशीनरी का संचालन करता है। हालांकि इन तमाम चर्चाओं और अटकलों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। न कोई सार्वजनिक बयान, न कोई प्रतिक्रिया। लेकिन राजनीति में अक्सर खामोशी को भी एक रणनीति माना जाता है। योगी आदित्यनाथ के समर्थक यह तर्क देते हैं कि मुख्यमंत्री की सबसे बड़ी ताकत संगठनात्मक पद नहीं बल्कि जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता है। उनका मानना है कि योगी अकेले अपने दम पर चुनावी माहौल बनाने की क्षमता रखते हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव से लेकर विभिन्न उपचुनावों तक योगी की भूमिका को भाजपा की जीत में महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। हाल के दिनों में भी कानून-व्यवस्था और अपराध के मुद्दे पर योगी आदित्यनाथ लगातार आक्रामक नजर आए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि अपराध और कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई बिना किसी भेदभाव के जारी रहेगी। ऐसे बयान उनके समर्थकों के बीच उनकी मजबूत छवि को और सुदृढ़ करते हैं। यही वजह है कि राजनीतिक जानकारों का एक वर्ग मानता है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सबसे बड़ी चुनावी ताकत आज भी योगी आदित्यनाथ ही हैं। वहीं दूसरी तरफ संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश संगठन पर है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रदेश संगठन की नई टीम आखिर कैसी होगी? क्या उसमें योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकताओं की झलक दिखाई देगी या फिर केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति पूरी तरह हावी नजर आएगी? क्या संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल देखने को मिलेगा या फिर राजनीतिक चर्चाओं को और हवा मिलेगी? इन सवालों का जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा। लेकिन इतना तय है कि उत्तर प्रदेश भाजपा के भीतर होने वाली हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर पूरे देश की नजर बनी हुई है। क्योंकि यूपी की राजनीति सिर्फ यूपी तक सीमित नहीं रहती, उसका असर सीधे राष्ट्रीय राजनीति पर पड़ता है। और यही वजह है कि दिल्ली से लेकर लखनऊ तक चल रही बैठकों, मुलाकातों और रणनीतियों को राजनीतिक विश्लेषक 2027 के महासंग्राम की शुरुआती तैयारी के रूप में देख रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इस सियासी शतरंज में अगली चाल कौन चलता है, संगठन किस दिशा में जाता है और 2027 की लड़ाई में भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा कौन बनकर उभरता है। फिलहाल एक बात तय है—यूपी बीजेपी के भीतर चल रही हलचल ने राजनीतिक तापमान को काफी बढ़ा दिया है और आने वाले दिनों में यह चर्चा और तेज होने वाली है।