“परिवारवाद पर सबसे ज्यादा हमला करने वाली बीजेपी के भीतर क्या अब सियासी विरासत की नई कहानी लिखी जा रही है? 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के कई बड़े नेताओं के बेटे-बेटियां अचानक मैदान में सक्रिय हो गए हैं। कोई जनता के बीच पहुंच रहा है, कोई संगठन में पकड़ मजबूत कर रहा है, तो कोई अपने माता-पिता की सीटों पर दावेदारी की तैयारी में जुटा है।
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सवाल उठ रहा है कि क्या 2027 में बीजेपी के कई दिग्गज नेता अपने बच्चों को राजनीति की पिच पर उतारने की तैयारी कर रहे हैं? और अगर ऐसा हुआ तो परिवारवाद पर विपक्ष के हमलों का जवाब बीजेपी कैसे देगी? आइए बताते हैं पूरी अंदर की कहानी…”उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से हलचल तेज हो गई है। खास बात यह है कि इस बार चर्चा केवल नेताओं की नहीं, बल्कि उनके बेटों और बेटियों की भी हो रही है। बीजेपी के कई बड़े चेहरे चाहते हैं कि उनकी राजनीतिक विरासत अब अगली पीढ़ी संभाले। सबसे ज्यादा चर्चा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के छोटे बेटे नीरज सिंह की है। बड़े बेटे पंकज सिंह पहले से विधायक हैं, जबकि नीरज पिछले कई वर्षों से लखनऊ में लगातार सक्रिय हैं। पार्टी कार्यक्रमों से लेकर सामाजिक आयोजनों तक उनकी मौजूदगी बढ़ी है। चर्चा है कि उन्हें लखनऊ पूर्व विधानसभा सीट से मौका मिल सकता है या फिर संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। वहीं जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के बेटे अभिनव सिन्हा भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। गाजीपुर में उनकी सक्रियता लगातार बढ़ी है। सूत्रों की मानें तो बीजेपी उन्हें गाजीपुर सदर सीट से उम्मीदवार बना सकती है। 2024 में भी उनके नाम की चर्चा थी, लेकिन टिकट नहीं मिला था। उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के बेटे करण महाना भी पीछे नहीं हैं। भाजपा युवा मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य करण ने अपने पिता के क्षेत्र महाराजपुर में गतिविधियां बढ़ा दी हैं। इससे उनके चुनाव लड़ने की अटकलें और तेज हो गई हैं।

झारखंड के राज्यपाल और बीजेपी के वरिष्ठ नेता संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार का नाम भी दावेदारों की सूची में शामिल है। बरेली की बहेड़ी सीट से उन्हें मौका मिलने की चर्चा है। स्थानीय समीकरणों और संगठन में उनकी सक्रियता को देखते हुए उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। उधर पूर्व सांसद और विवादों में रहने वाले बीजेपी नेता बृजभूषण शरण सिंह की बेटी शालिनी सिंह भी लगातार सुर्खियों में हैं। नोएडा में उनकी सक्रियता तेजी से बढ़ी है। सामाजिक मुद्दों पर उनकी मुखर मौजूदगी और जनता से संपर्क को देखते हुए उन्हें भी भविष्य का बड़ा चेहरा माना जा रहा है। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि नोएडा सीट पर पहले से राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह मौजूद हैं, ऐसे में पार्टी क्या फैसला लेती है, इस पर सबकी नजर रहेगी। पूर्व केंद्रीय मंत्री रीता बहुगुणा जोशी भी अपने बेटे मयंक जोशी के राजनीतिक भविष्य को लेकर सक्रिय बताई जा रही हैं। मयंक का नाम पहले भी चुनावी टिकट की चर्चा में रहा है। हालांकि वह बीच में समाजवादी पार्टी के करीब चले गए थे, लेकिन अब फिर बीजेपी में उनकी संभावित वापसी और टिकट की चर्चा तेज हो गई है। इसके अलावा पूर्व सांसद संजय सिंह की बेटी आकांक्षा सिंह भी अमेठी में सक्रिय नजर आ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट की वकील आकांक्षा लगातार जनता से संपर्क बढ़ा रही हैं। परिवार चाहता है कि अब अमेठी में राजनीतिक विरासत की कमान नई पीढ़ी संभाले। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या 2027 का चुनाव बीजेपी में नई पीढ़ी के नेताओं की एंट्री का चुनाव बनेगा? क्या पार्टी इन दिग्गज नेताओं के बेटों और बेटियों को टिकट देकर नया चेहरा पेश करेगी, या फिर परिवारवाद के आरोपों से बचने के लिए कोई दूसरा रास्ता अपनाएगी? फिलहाल टिकटों पर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व को करना है, लेकिन इतना तय है कि 2027 की लड़ाई में केवल पुराने दिग्गज ही नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक विरासत भी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।”






