लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी का दौर एक बार फिर तेज हो गया है। करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजपाल सिंह अम्मू द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर पर की गई टिप्पणी के बाद सियासी घमासान छिड़ गया है। सूरजपाल सिंह अम्मू ने एक कार्यक्रम के दौरान ओपी राजभर पर तीखा हमला बोला था। उनके बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई। अब ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया के जरिए अम्मू को करारा जवाब दिया है।
राजभर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लंबी पोस्ट साझा करते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता कि “कथित करणी सेना के कथित नेता” सूरजपाल सिंह अम्मू कौन हैं, लेकिन उनका दर्द सबको समझ में आ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अम्मू विधायक बनना चाहते हैं, लेकिन जनता का विश्वास हासिल नहीं कर पा रहे हैं।
राजभर ने अपने पोस्ट में कहा कि कुछ लोग दूसरों को अपमानित कर नेता बनने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि असली नेतृत्व समाज के लिए काम करने से मिलता है। उन्होंने कहा कि पिछड़े वर्गों को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित किया है और इसी वजह से कुछ लोगों को उनकी राजनीति पसंद नहीं आती।
कैबिनेट मंत्री ने अम्मू पर सामंती सोच रखने का आरोप लगाते हुए कहा कि इतिहास में पिछड़े और वंचित समाज के लोगों को बराबरी के अधिकारों से वंचित रखा गया। उन्होंने कहा कि सच्चा क्षत्रिय समाज को साथ लेकर चलता है, जबकि अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने वाले लोग समाज को बांटने का काम करते हैं।
ओम प्रकाश राजभर ने अम्मू की चुनाव लड़ने की चुनौती पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को चुनाव लड़ने का अधिकार है और जनता ही तय करेगी कि कौन योग्य है और कौन अयोग्य। उन्होंने विश्वास जताया कि चुनाव परिणाम ही जनता का अंतिम फैसला होंगे। राजभर ने अपने पोस्ट में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति सामाजिक न्याय, अंत्योदय और “सबका साथ, सबका विकास” के सिद्धांतों पर आधारित है।
पोस्ट के अंत में उन्होंने कहा कि उन्हें किसी के प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है और विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद जनता खुद लायक और नालायक का फर्क बता देगी।






