काशी को मिलेगी एक और ऐतिहासिक पहचान
दुनिया के सबसे प्राचीन शहरों में शामिल वाराणसी अपनी आध्यात्मिक विरासत और भगवान शिव से जुड़े गहरे संबंधों के लिए प्रसिद्ध है, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काशी भगवान शंकर के त्रिशूल पर बसी हुई नगरी है और यहां के कण-कण में शिव का वास माना जाता है, अब इसी आध्यात्मिक नगरी को एक नई और भव्य पहचान मिलने जा रही है, वाराणसी में दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग स्थापित करने की तैयारी शुरू हो चुकी है।
100 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा भव्य शिवलिंग
जानकारी के अनुसार, वाराणसी के भेलूपुर स्थित जलकल विभाग के पास लगभग 20 एकड़ भूमि पर विश्व का सबसे ऊंचा शिवलिंग स्थापित किया जाएगा, इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, नगर निगम द्वारा इसके लिए भूमि चिन्हित की जा चुकी है और अगले 9 से 10 महीनों के भीतर निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
शिव थीम पर विकसित होगा आधुनिक अर्बन पार्क
शिवलिंग स्थापना के साथ-साथ परिसर में एक भव्य अर्बन पार्क भी विकसित किया जाएगा। पार्क की थीम भगवान शिव से जुड़ी होगी, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आध्यात्मिक अनुभव के साथ आधुनिक सुविधाएं भी मिल सकेंगी, परियोजना में आकर्षक लैंडस्केपिंग, बैठने की व्यवस्था और मनोरंजन के कई विकल्प शामिल किए जाएंगे।
लेजर शो बनेगा प्रमुख आकर्षण
परिसर में आधुनिक तकनीक से लैस लेजर शो का भी आयोजन किया जाएगा। इस शो के माध्यम से भगवान शिव, काशी की धार्मिक विरासत और सांस्कृतिक इतिहास को रोचक तरीके से प्रस्तुत किया जाएगा, यह आकर्षण स्थानीय लोगों के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए भी खास रहेगा।
भगवान शिव से है काशी की पहचान
वाराणसी में द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री काशी विश्वनाथ धाम स्थित है, जो करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसके अलावा शहर में अनेक प्राचीन शिव मंदिर और शिवालय मौजूद हैं, जिनका उल्लेख विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में मिलता है, हर वर्ष लाखों श्रद्धालु और पर्यटक काशी पहुंचकर भगवान शिव के दर्शन और पूजा-अर्चना करते हैं।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
दुनिया के सबसे ऊंचे शिवलिंग की स्थापना के बाद वाराणसी के धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है, परियोजना पूरी होने के बाद श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक नए आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक स्थल का अनुभव प्राप्त होगा, जिससे काशी की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी।






