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दिल्ली में मोदी का जलवा तो यूपी में योगी का दबदबा कायम ! 27 में बीजेपी की होगी प्रचंड वापसी

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दिल्ली में मोदी का जलवा… तो लखनऊ में योगी का दबदबा! एक तरफ बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल पूरे होने का जश्न मना रही है, दूसरी तरफ 2027 के चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में एक सवाल सियासी गलियारों में तूफान मचा रहा है—क्या बीजेपी फिर योगी के चेहरे पर चुनाव लड़ेगी या दिल्ली से तय होगी पूरी रणनीति? भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के एक बयान ने नई बहस छेड़ दी है।

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क्या यह सिर्फ संगठन की लाइन है या फिर योगी बनाम दिल्ली की ताकत का संकेत? और आखिर मोदी के बाद बीजेपी में सबसे ताकतवर कौन—अमित शाह या योगी आदित्यनाथ? आइए समझते हैं इस पूरे सियासी समीकरण को। देश की राजनीति में इस वक्त दो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं—दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार 12 साल पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी पूरे देश में जश्न मना रही है। भाजपा नेताओं का कहना है कि नरेंद्र मोदी ने वह इतिहास रच दिया है जो अब तक कोई निर्वाचित प्रधानमंत्री नहीं कर पाया। लंबे समय तक लगातार देश की बागडोर संभालने का रिकॉर्ड अब उनके नाम दर्ज हो चुका है। इस उपलब्धि का सबसे ज्यादा उत्साह उत्तर प्रदेश में देखने को मिला। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी सुबह-सुबह लखनऊ के हनुमान सेतु मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना की। प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर पहुंचे। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र नीरज सिंह और लखनऊ महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी बुद्धेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन करने पहुंचे। नोएडा से विधायक पंकज सिंह ने भी भगवान का आशीर्वाद लेकर प्रधानमंत्री मोदी के 12 साल पूरे होने पर खुशी जाहिर की। लेकिन इसी जश्न के बीच एक बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी। जब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से पूछा गया कि 2027 का विधानसभा चुनाव किसके नेतृत्व में लड़ा जाएगा, तो उन्होंने किसी एक चेहरे का नाम लेने के बजाय संगठन और सामूहिक नेतृत्व की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा संगठन की ताकत और सामूहिक नेतृत्व के आधार पर चुनाव लड़ती है।

योगी आदित्यनाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं, लेकिन पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व और संगठन का मार्गदर्शन सबसे महत्वपूर्ण है। पंकज चौधरी के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा किसी एक चेहरे पर निर्भर रहने की बात सार्वजनिक तौर पर नहीं करती, जबकि दूसरी तरफ यह भी माना जाता है कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ पार्टी के सबसे लोकप्रिय नेताओं में शामिल हैं। 2017 और 2022 के चुनाव में भी उनके नेतृत्व और सरकार के कामकाज को प्रमुखता से पेश किया गया था। इसी बीच बीते दिनों कुछ विभागों में फेरबदल और संगठन तथा सरकार के बीच तालमेल को लेकर भी चर्चाएं तेज हुई थीं। ऐसे में पंकज चौधरी के बयान को कई लोग अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं। हालांकि भाजपा की ओर से लगातार यही कहा जाता रहा है कि पार्टी सामूहिक नेतृत्व और संगठनात्मक शक्ति के आधार पर आगे बढ़ती है। राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश में भाजपा के सबसे बड़े जनाधार वाले नेताओं में से एक हैं। वह राज्य के सबसे लंबे समय तक लगातार मुख्यमंत्री रहने वाले नेताओं में शामिल हो चुके हैं और 2027 में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भाजपा का सबसे प्रभावशाली रणनीतिकार माना जाता है। पार्टी संगठन से लेकर राज्यों में अध्यक्षों की नियुक्ति और चुनावी रणनीति तक में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है। कई सर्वेक्षणों में भी मोदी के बाद अमित शाह और योगी आदित्यनाथ को भाजपा के प्रमुख चेहरों में गिना गया है। हालांकि भाजपा के भीतर शीर्ष नेतृत्व की ताकत और लोकप्रियता को लेकर होने वाली चर्चाओं के बीच पार्टी का आधिकारिक रुख हमेशा यही रहा है कि वह व्यक्ति नहीं बल्कि संगठन की शक्ति के आधार पर चुनाव लड़ती है। फिलहाल, एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल पूरे होने का जश्न है, तो दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी तेज हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी प्रधानमंत्री मोदी को बधाई देते हुए कहा है कि उनके नेतृत्व में देश और उत्तर प्रदेश समग्र विकास की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2027 में उत्तर प्रदेश का चुनाव किस रणनीति और किस चेहरे के साथ लड़ा जाएगा। क्या भाजपा एक बार फिर योगी के नेतृत्व को सबसे आगे रखेगी या संगठन और सामूहिक नेतृत्व का फॉर्मूला ही उसकी सबसे बड़ी ताकत बनेगा? आने वाले दिनों में इस पर तस्वीर और साफ होती दिखाई दे सकती है।