क्या 2027 से पहले कुंडा से उठने जा रही है ऐसी हुंकार, जिसकी गूंज लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सुनाई देगी? क्या राजा भैया अब वही दांव चलने जा रहे हैं, जिसने कभी बृजभूषण शरण सिंह को सुर्खियों के केंद्र में ला दिया था? कुंडा का किला एक बार फिर सजने वाला है, बड़े-बड़े नेता, लंबे काफिले और हजारों की भीड़ जुटने वाली है। और इसकी वजह बनने जा रहे हैं बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री।
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हिंदुत्व के पिच पर लगातार आक्रामक बल्लेबाजी कर रहे राजा भैया का यह कदम सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि 2027 से पहले एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है। आखिर कुंडा में ऐसा क्या होने वाला है, जिसकी चर्चा अभी से पूरे उत्तर प्रदेश में शुरू हो गई है? जी हां, प्रतापगढ़ के कुंडा से विधायक और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने अपने गृह ग्राम में भव्य श्रीराम कथा के आयोजन का संकल्प लिया है। इस कथा का वाचन देशभर में चर्चित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री करेंगे। इसी सिलसिले में बीते दिनों राजा भैया, एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह और उनके दोनों पुत्र बागेश्वर धाम पहुंचे और विधिवत धीरेंद्र शास्त्री को आमंत्रित करते हुए उनका आशीर्वाद लिया। बताया जा रहा है कि राजा भैया ने केवल कथा कराने का ही संकल्प नहीं लिया, बल्कि बागेश्वर धाम से जुड़े श्रद्धालुओं और संतों को भी कुंडा आने का निमंत्रण दिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि जब धीरेंद्र शास्त्री कुंडा पहुंचेंगे, तो वहां साधु-संतों, समर्थकों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का विशाल जमावड़ा देखने को मिल सकता है।दरअसल, राजा भैया और पंडित धीरेंद्र शास्त्री के बीच करीबी पहले से ही चर्चा का विषय रही है। जब धीरेंद्र शास्त्री हिंदू राष्ट्र यात्रा को लेकर चर्चा में थे, तब भी राजा भैया उनके साथ दिखाई दिए थे। यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में इस आयोजन को केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राजा भैया के बढ़ते हिंदुत्व वाले तेवर और 2027 से पहले उनकी बढ़ती सक्रियता से जोड़कर भी देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजा भैया की लोकप्रियता केवल ठाकुर समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि कई वर्गों में उनका प्रभाव देखा जाता है। शायद यही कारण है कि वह लगातार सनातन और हिंदुत्व के मुद्दों पर मुखर होकर अपनी अलग पहचान बनाने में जुटे हुए हैं।






