बिहार की केंद्रीय आदर्श कारा बेऊर में कथित संगठित भ्रष्टाचार के मामले में राज्य सरकार ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए जेल अधीक्षक समेत सात अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसे मौजूदा सरकार के कार्यकाल में जेल प्रशासन से जुड़ी सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि जेलों में भ्रष्टाचार, लापरवाही और नियमों के उल्लंघन को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, बेऊर जेल में लंबे समय से अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की शिकायतें मिल रही थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभाग ने जांच कराई, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया। सरकार का मानना है कि जेल प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जरूरी है।
जेल अधीक्षक समेत सात अधिकारियों पर कार्रवाई
सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार केंद्रीय आदर्श कारा बेऊर के जेल अधीक्षक नीरज कुमार झा को निलंबित कर दिया गया है। उनके अलावा चार सहायक अधीक्षक, एक उपाधीक्षक और एक उच्च कक्षपाल के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
सूत्रों के मुताबिक, उच्च कक्षपाल संजीव कुमार ठाकुर पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन पर जेल अधीक्षक के साथ मिलकर जेल के भीतर कथित भ्रष्टाचार के नेटवर्क को संचालित करने में भूमिका निभाने का आरोप है। इन्हीं आरोपों के आधार पर उन्हें भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
जेल प्रशासन को संभालने के लिए नई नियुक्तियां
सरकार ने केवल कार्रवाई तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि जेल प्रशासन को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए नई नियुक्तियों की भी घोषणा की है। इसके तहत कटिहार से स्थानांतरित कर सुधीर कुमार शर्मा को केंद्रीय आदर्श कारा बेऊर का नया कारा उपाधीक्षक नियुक्त किया गया है।
इसके अलावा ज्योति कुमारी को सहायक कारा अधीक्षक बनाया गया है। वहीं राजीव रंजन और प्रियत्तम प्रियदर्शी को भी सहायक कारा अधीक्षक के पद पर तैनात किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इन नियुक्तियों का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना और जेल प्रबंधन में पारदर्शिता बनाए रखना है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार का सख्त संदेश
राज्य सरकार की इस कार्रवाई को जेल प्रशासन में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जेलों में नियमों का पालन और कैदियों के लिए निर्धारित व्यवस्थाओं को पारदर्शी तरीके से लागू करना सरकार की प्राथमिकता है।
सरकार का मानना है कि यदि किसी स्तर पर भ्रष्टाचार या अनियमितता पाई जाती है तो उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। यही कारण है कि बेऊर जेल मामले में त्वरित निर्णय लेते हुए सात अधिकारियों को निलंबित किया गया।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
फिलहाल पूरे मामले की विभागीय जांच जारी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित भ्रष्टाचार का दायरा कितना बड़ा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच के दौरान और तथ्य सामने आते हैं तथा आरोपों की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ और भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
बेऊर जेल में हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट आने के बाद मामले में कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। सरकार की इस सख्त कार्रवाई को प्रशासनिक जवाबदेही और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के रूप में देखा जा रहा है।






