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30 दिन में 3.70 लाख आवेदन, 9 हजार अधिकारियों को नोटिस! सहयोग कार्यक्रम का रिपोर्ट कार्ड लेकर सामने आए सीएम सम्राट चौधरी

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बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपनी सरकार के महत्वाकांक्षी जनसंपर्क अभियान “सहयोग कार्यक्रम” का रिपोर्ट कार्ड सार्वजनिक किया है। सरकार का दावा है कि इस अभियान ने आम लोगों की समस्याओं के समाधान और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण परिणाम दिए हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, मात्र 30 दिनों के भीतर राज्यभर से लाखों लोगों ने अपनी शिकायतें और आवेदन सरकार तक पहुंचाए, जिनमें से अधिकांश मामलों का निस्तारण भी कर दिया गया है।

पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि सहयोग कार्यक्रम के तहत राज्यभर में लगाए गए विशेष शिविरों के माध्यम से कुल 3 लाख 70 हजार आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से करीब 3 लाख 20 हजार मामलों का समाधान कर दिया गया है, जबकि शेष मामलों पर कार्रवाई जारी है। सरकार का कहना है कि इस पहल के जरिए आम लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिली है और शिकायतों का समाधान स्थानीय स्तर पर ही किया जा रहा है।

अधिकारियों पर हुई सख्त कार्रवाई

सहयोग कार्यक्रम की सबसे अधिक चर्चा उन प्रशासनिक कार्रवाइयों को लेकर हो रही है, जो लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ की गईं। मुख्यमंत्री ने बताया कि अभियान के पहले चरण में करीब 9 हजार अधिकारियों और कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गए। यह कार्रवाई उन मामलों में की गई, जहां शिकायतों के निस्तारण में देरी या लापरवाही सामने आई थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का स्पष्ट संदेश था कि जनता के कार्यों में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर इस सख्ती का असर भी देखने को मिला। दूसरे चरण में नोटिस पाने वाले अधिकारियों की संख्या घटकर लगभग 350 रह गई।

तीसरे चरण में सिर्फ एक अधिकारी को नोटिस

सम्राट चौधरी ने बताया कि प्रशासनिक सुधार का असर इतना व्यापक रहा कि तीसरे चरण में केवल एक अधिकारी को नोटिस जारी करना पड़ा। हालांकि, उस अधिकारी ने भी निर्धारित समय सीमा पूरी होने से पहले लंबित कार्यों का निस्तारण कर दिया। मुख्यमंत्री ने इसे प्रशासनिक जवाबदेही और कार्य संस्कृति में सुधार का सकारात्मक संकेत बताया।

जनता को मिल रही राहत

सरकार का दावा है कि सहयोग शिविरों के माध्यम से लोगों की समस्याओं का समाधान तेजी से हो रहा है। पहले जहां लोगों को विभिन्न सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, वहीं अब शिकायतों का निपटारा शिविरों में ही किया जा रहा है। इससे न केवल लोगों का समय बच रहा है, बल्कि आर्थिक बोझ भी कम हुआ है।

अभियान के तहत राजस्व, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, प्रमाण पत्र, भूमि विवाद, बिजली, जलापूर्ति और अन्य जनसुविधाओं से जुड़े मामलों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया गया है।

क्या प्रशासनिक सुधार का नया मॉडल बनेगा?

सहयोग कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज है। सरकार इसे सुशासन और जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। वहीं विपक्ष और कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी वर्ष में शुरू किए गए इस अभियान की वास्तविक सफलता का आकलन जनता के अनुभवों के आधार पर ही किया जा सकेगा।

फिलहाल सरकार के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि प्रशासनिक तंत्र पर निगरानी और जवाबदेही बढ़ाने का प्रयास किया गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सहयोग कार्यक्रम भविष्य में भी इसी प्रभाव के साथ जारी रहता है या नहीं। अंतिम फैसला बिहार की जनता ही करेगी कि यह पहल उनके लिए कितनी कारगर साबित हुई है।