कुशीनगर में जर्जर सड़क से परेशान ग्रामीणों ने विरोध का ऐसा तरीका अपनाया, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। करीब दो दशक से सड़क निर्माण की मांग कर रहे ग्रामीणों ने कीचड़ और जलभराव से भरी सड़क पर धान की रोपाई कर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान ग्रामीणों ने “सड़क नहीं तो धान सही” के नारे लगाते हुए जल्द सड़क निर्माण की मांग की।
मामला कुशीनगर जिले के नेबुआ नौरंगिया विकास खंड के कोहरगड्डी गांव के कचहरिया टोला का है। गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली सड़क वर्षों से बदहाल पड़ी है। बरसात के मौसम में यह सड़क पूरी तरह जलमग्न हो जाती है और कीचड़ से भर जाती है। हालात ऐसे हैं कि पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। प्रशासन का ध्यान खींचने के लिए ग्रामीण सड़क पर उतर आए और उसी सड़क पर धान की रोपाई शुरू कर दी।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाली का सबसे ज्यादा खामियाजा स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और मरीजों को उठाना पड़ता है। बारिश के दिनों में एंबुलेंस तक गांव में नहीं पहुंच पाती, जबकि किसानों को अपनी फसल बाजार तक ले जाने में भारी दिक्कत होती है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की गई, लेकिन आज तक सड़क निर्माण शुरू नहीं हुआ।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हर चुनाव में सड़क बनाने का वादा किया जाता है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को भूल जाते हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। फिलहाल सड़क पर धान की रोपाई का यह अनोखा प्रदर्शन पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग पर कब तक कार्रवाई करता है।






