लखनऊ, 5 अगस्त। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में खेल अवसंरचना को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। इसी कड़ी में गोरखपुर में निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण तय समयसीमा के अनुसार तेजी से आगे बढ़ रहा है। करीब 392.94 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का भूमिपूजन के महज तीन महीने के भीतर लगभग 20 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।
सरकार का मानना है कि स्टेडियम के तैयार होने के बाद पूर्वांचल को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का नया केंद्र मिलेगा। इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की मेजबानी संभव होगी, बल्कि क्षेत्र के खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
भूमिपूजन के बाद युद्धस्तर पर निर्माण
16 मई 2026 को भूमिपूजन और शिलान्यास के बाद लोक निर्माण विभाग ने ईपीसी मोड पर निर्माण कार्य शुरू किया। मुख्य स्टेडियम परिसर की लेवलिंग और पाइल फाउंडेशन का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि बाहरी क्षेत्र में सड़क निर्माण, लेवलिंग और अन्य आधारभूत कार्य तेजी से जारी हैं। परियोजना के लिए अब तक 110 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जारी की जा चुकी है।
46 एकड़ में बनेगा 30 हजार क्षमता वाला स्टेडियम
करीब 46 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाला यह स्टेडियम 30 हजार दर्शकों की क्षमता वाला होगा। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में सरकार ने परियोजना के लिए 50 करोड़ रुपये की दूसरी किश्त भी जारी कर दी है। इससे पहले 63.39 करोड़ रुपये की पहली किश्त जारी की जा चुकी थी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समयसीमा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय मानकों की होंगी सुविधाएं
ग्राउंड प्लस टू फ्लोर मॉडल पर बन रहे इस स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय स्तर की क्रिकेट पिच, आधुनिक आउटफील्ड, हाई-मास्ट फ्लडलाइट्स, अत्याधुनिक ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम, विश्वस्तरीय ड्रेसिंग रूम, अभ्यास सुविधाएं और दर्शकों के लिए आधुनिक बैठने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। सभी तकनीकी मानकों की निगरानी के लिए खेल निदेशक की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है।
गुणवत्ता और पारदर्शिता पर विशेष जोर
निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट अनिवार्य किया गया है। परियोजना में धनराशि का भुगतान गुणवत्ता परीक्षण और निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर किया जा रहा है। चूंकि स्टेडियम का क्षेत्र अपेक्षाकृत निचला है, इसलिए जलभराव से बचाव के लिए आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम भी विकसित किया जा रहा है। साथ ही सभी आवश्यक पर्यावरणीय और वैधानिक स्वीकृतियां भी सुनिश्चित की जा रही हैं।






