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रिटायरमेंट लाभ से 11.51 लाख की कटौती पर हाईकोर्ट सख्त, UP सरकार को 7% ब्याज समेत रकम लौटाने का आदेश

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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी के रिटायरमेंट लाभों से की गई रकम की कटौती को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार को अहम निर्देश दिया है। अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि सेवानिवृत्त हेड कांस्टेबल (चालक) के लाभों से गलत तरीके से काटे गए 11,51,840 रुपये की राशि छह सप्ताह के भीतर वापस की जाए। कोर्ट ने इस रकम पर 7 फीसदी सालाना ब्याज देने का भी निर्देश दिया है।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि सेवानिवृत्ति के समय किसी कर्मचारी से ऐसी वसूली नहीं की जा सकती, जिसे बाद में वेतन के पुनर्निर्धारण के आधार पर पिछली तारीख से लागू किया गया हो। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्ति से पहले कर्मचारी द्वारा दिए गए सामान्य घोषणापत्र को मनमाने ढंग से पिछली अवधि की वेतन कटौती या रिकवरी का आधार नहीं बनाया जा सकता।

1984 में PAC में हुई थी नियुक्ति

यह मामला याचिकाकर्ता बृजेश सिंह डागर से जुड़ा है। उनकी नियुक्ति 20 फरवरी 1984 को उत्तर प्रदेश प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (PAC) में कांस्टेबल के पद पर हुई थी। बाद में उनका तबादला सिविल पुलिस में कर दिया गया। वह हेड कांस्टेबल (चालक) के पद पर कार्यरत रहे और 31 जुलाई 2025 को सेवानिवृत्त हुए।सेवानिवृत्ति से कुछ समय पहले 24 अक्टूबर 2024 को संबंधित अधिकारी की ओर से उन्हें वेतनमान के पुनर्निर्धारण को लेकर स्पष्टीकरण देने के लिए नोटिस जारी किया गया था।

वेतन 64,100 से घटाकर 56,900 रुपये किया गया

याचिकाकर्ता ने 26 अक्टूबर 2024 को अपना जवाब दाखिल करते हुए कहा था कि उन्होंने वेतन वृद्धि के लिए कभी कोई आवेदन नहीं किया था। उन्होंने यह भी बताया कि वह जल्द ही सेवानिवृत्त होने वाले थे और उन पर कई वित्तीय जिम्मेदारियां थीं।हालांकि, उनका स्पष्टीकरण स्वीकार नहीं किया गया। इसके बाद 15 फरवरी 2025 के आदेश के जरिए उनका वेतन 64,100 रुपये से घटाकर 56,900 रुपये कर दिया गया। इस संशोधन को 1 जुलाई 2023 से प्रभावी माना गया।इसके बाद पहले से दिए गए अतिरिक्त वेतन की राशि की गणना कर उसे याचिकाकर्ता के सेवानिवृत्ति लाभों से काट लिया गया। इसी कार्रवाई को उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने पिछली तारीख से वसूली पर जताई आपत्ति

मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अपने ही पूर्व फैसले का हवाला दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी से लिया गया सामान्य घोषणापत्र पिछली तारीख से किए गए वेतन पुनर्निर्धारण और उसके आधार पर वसूली के लिए खुली अनुमति नहीं माना जा सकता।कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता से काटी गई 11.51 लाख रुपये से अधिक की राशि छह सप्ताह के भीतर वापस की जाए। इस रकम पर 7 फीसदी वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

RTI के कथित दुरुपयोग पर भी कोर्ट सख्त

इसी दौरान हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले में सूचना का अधिकार यानी RTI Act के कथित दुरुपयोग पर भी कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने संबंधित याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर 6.70 लाख रुपये का हर्जाना लगाया।

अदालत ने कहा कि RTI कानून का उद्देश्य शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है। इसका इस्तेमाल अनावश्यक मुकदमेबाजी करने या न्यायिक व्यवस्था पर बेवजह अतिरिक्त बोझ डालने के लिए नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट के इन दोनों रुख से स्पष्ट है कि अदालत एक ओर कर्मचारियों के वैध सेवानिवृत्ति लाभों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है, वहीं दूसरी ओर न्यायिक और कानूनी प्रक्रियाओं के दुरुपयोग को भी स्वीकार नहीं करेगी।

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