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WhatsApp Alert से बची प्रसूता की जान, यूपी में ‘मातृ सेवा’ मॉडल ने दिखाया असर; पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी

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गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए शुरू किए गए ‘मातृ सेवा’ पायलट प्रोजेक्ट का असर अब सामने आने लगा है। देवरिया की 34 वर्षीय रिंकी देवी का मामला इस मॉडल की उपयोगिता का उदाहरण बना है। प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव होने पर उन्हें तत्काल उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया गया और अस्पतालों के बीच पहले से स्थापित समन्वय के कारण समय रहते इलाज शुरू हो सका।

जानकारी के मुताबिक, रिंकी देवी ने देवरिया के पथरदेवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में एक शिशु को जन्म दिया। प्रसव के बाद उन्हें पोस्टपार्टम हैमरेज (PPH) यानी अत्यधिक प्रसवोत्तर रक्तस्राव होने लगा। स्थिति को गंभीर देखते हुए देवरिया की स्वास्थ्य टीम ने तत्काल गोरखपुर की रेफरल ट्रैकिंग टीम को इसकी जानकारी दी।रेफरल टीम को बताया गया कि मरीज को बेहतर उपचार के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर भेजा जा रहा है। सूचना मिलते ही गोरखपुर टीम ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी टीम से संपर्क कर मरीज के पहुंचने से पहले ही जरूरी तैयारियां पूरी कर लीं।

WhatsApp पर अलर्ट, अस्पताल पहले से तैयार

मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए जरूरत पड़ने पर आपातकालीन रक्त की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए। WhatsApp पर अलर्ट मिलते ही बीआरडी मेडिकल कॉलेज की टीम सक्रिय हो गई।रिंकी देवी के अस्पताल पहुंचते ही बिना समय गंवाए रक्त चढ़ाने और आपात उपचार की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। मरीज के पहुंचने से पहले ही आवश्यक औपचारिकताओं और उपचार संबंधी तैयारियों को पूरा कर लिया गया था। इससे अस्पताल में पहुंचने के बाद इलाज शुरू करने में अनावश्यक देरी नहीं हुई और समय रहते उनकी जान बचाई जा सकी।

दो महीने में 363 हाई रिस्क गर्भवतियों का इलाज

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, गोरखपुर में इसी साल मई से ‘मातृ सेवा’ पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत अब तक 363 गर्भवती महिलाओं को उपचार उपलब्ध कराया गया है।इनमें बड़ी संख्या ऐसी महिलाओं की रही जिन्हें हाई रिस्क श्रेणी में रखा गया था। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 55 मामले पोस्टपार्टम हैमरेज के थे, जबकि कुल 77 गर्भवती महिलाएं ऐसी थीं जिनमें पोस्टपार्टम हैमरेज, गंभीर एनीमिया और गर्भावस्था के दौरान अचानक दौरे पड़ने जैसी गंभीर स्थितियां थीं।अधिकारियों का कहना है कि इन महिलाओं की समय रहते पहचान, अस्पतालों के बीच रियल टाइम समन्वय और तत्काल रेफरल की व्यवस्था ने उपचार को आसान बनाया।

कैसे काम करता है ‘मातृ सेवा’ मॉडल?

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवल के मुताबिक, इस मॉडल के तहत यूपी टेक्निकल सपोर्ट यूनिट और स्वास्थ्य विभाग ने एक साझा WhatsApp नेटवर्क तैयार किया है। इसमें एम्स गोरखपुर, बीआरडी मेडिकल कॉलेज, जिला महिला अस्पताल, सीएचसी-पीएचसी, सीएमओ कार्यालय, एंबुलेंस नेटवर्क के साथ आशा, एएनएम, नर्स और सीएचओ को जोड़ा गया है।जैसे ही किसी गर्भवती महिला को हाई रिस्क श्रेणी में चिन्हित किया जाता है, संबंधित स्वास्थ्य केंद्र और रेफरल टीम को तत्काल सूचना मिल जाती है। इसके बाद मरीज को आवश्यकतानुसार उच्च चिकित्सा संस्थान भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है।

21 मई से शुरू हुआ अभियान

सीएमओ डॉ. राजेश झा के मुताबिक, यह पायलट प्रोजेक्ट 21 मई से शुरू किया गया था। शुरुआती आंकड़ों को स्वास्थ्य विभाग ने उत्साहजनक बताया है।इस मॉडल का उद्देश्य हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान और उन्हें बिना देरी उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। स्वास्थ्य विभाग अब इस मॉडल को उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी लागू करने की तैयारी कर रहा है।अगर यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू होती है तो प्रसव के दौरान होने वाली गंभीर जटिलताओं में समय पर हस्तक्षेप संभव होगा। इससे मातृ मृत्यु दर को कम करने और ग्रामीण क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को समय पर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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