स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर योगी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में परिवहन विभाग ने प्रदेश के सभी विद्यालयों के प्रबंधकों को पत्र जारी कर स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। विभाग ने स्कूल प्रबंधन को बच्चों की सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही न बरतने की हिदायत दी है।
परिवहन विभाग के निर्देश के मुताबिक 12 वर्ष या उससे कम आयु के बच्चों को स्कूल ले जाने वाले वाहनों में एक परिचारक/परिचारिका की तैनाती अनिवार्य होगी। परिचारक बच्चों को वाहन में सुरक्षित चढ़ाने और उतारने में मदद करेगा तथा यात्रा के दौरान उनकी सुरक्षा पर नजर रखेगा।
चालकों का चरित्र सत्यापन और स्वास्थ्य परीक्षण जरूरी
विद्यालयों में संचालित स्कूल वाहनों के चालकों का चरित्र सत्यापन और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य रूप से कराया जाएगा। विभाग ने स्कूल प्रबंधन को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि बच्चों को ले जाने वाले वाहन चालक पूरी तरह योग्य और स्वस्थ हों।
हर महीने होगी सुरक्षा उपकरणों की जांच
स्कूल के ट्रांसपोर्ट इंचार्ज को वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें हर महीने स्कूल वाहनों में मौजूद प्राथमिक चिकित्सा किट, फायर एक्सटिंग्विशर, इमरजेंसी अलार्म सहित अन्य सुरक्षा उपकरणों की जांच करनी होगी। खराब या अनुपलब्ध उपकरणों को तत्काल दुरुस्त अथवा अपडेट कराया जाएगा।
अनफिट वाहनों से बच्चों को नहीं ले जाया जाएगा
परिवहन विभाग ने स्कूल प्रबंधन को वाहनों की फिटनेस, परमिट, बीमा और अन्य जरूरी दस्तावेजों की वैधता नियमित रूप से जांचने के निर्देश दिए हैं। किसी भी अनफिट या जरूरी दस्तावेजों के बिना संचालित वाहन का इस्तेमाल बच्चों के परिवहन के लिए नहीं किया जाएगा।
परिवहन विभाग करेगा नियमित चेकिंग
बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग की ओर से स्कूल वाहनों की नियमित जांच और चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन या सुरक्षा मानकों में कमी मिलने पर संबंधित स्कूल प्रबंधन और वाहन संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
योगी सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार का उद्देश्य स्कूल से घर और घर से स्कूल तक बच्चों की यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित बनाना है।






