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गाजियाबाद में धार्मिक आस्था की अनोखी तस्वीर, हरिद्वार से कांवड़ लेकर डासना मंदिर पहुंचीं तीन मुस्लिम महिलाएं

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गाजियाबाद। सावन के पावन महीने में गाजियाबाद से धार्मिक आस्था और आपसी सम्मान की एक अनोखी तस्वीर सामने आई। हरिद्वार की हर की पौड़ी से गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा पर निकलीं तीन मुस्लिम महिलाएं मंगलवार को डासना स्थित शिव शक्ति धाम मंदिर पहुंचीं। महिलाओं ने अपने साथ लाई कांवड़ के गंगाजल से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। मंदिर पहुंचने पर श्रद्धालुओं और मंदिर प्रशासन की ओर से उनका फूल मालाओं से स्वागत किया गया।

महिलाओं के मंदिर पहुंचने की खबर के बाद परिसर में मौजूद लोगों में भी उत्सुकता दिखाई दी। तीनों महिलाओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक करने के बाद मंदिर में पूजा अर्चना की और प्रसाद ग्रहण किया।

मंदिर परिसर में फूल मालाओं से हुआ स्वागत

डासना मंदिर पहुंचीं तीनों महिलाओं का श्रद्धालुओं और मंदिर प्रशासन की ओर से स्वागत किया गया। इस दौरान डासना मंदिर के पीठाधीश्वर और पंचम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद सरस्वती भी मौजूद रहे।महामंडलेश्वर ने महिलाओं से बातचीत की और हरिद्वार से डासना तक कांवड़ लेकर पहुंचने के उनके संकल्प के बारे में जानकारी ली। उन्होंने महिलाओं के यात्रा पूरी कर मंदिर पहुंचने की सराहना की।जलाभिषेक के बाद महिलाओं को प्रसाद दिया गया। मंदिर की ओर से उनके ठहरने और भोजन की व्यवस्था किए जाने की भी जानकारी दी गई।

यति नरसिंहानंद ने महिलाओं के संकल्प की सराहना की

इस मौके पर महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद सरस्वती ने तीनों महिलाओं की कांवड़ यात्रा को उनके संकल्प, साहस और तपस्या से जोड़ते हुए उनकी सराहना की। उन्होंने कहा कि हरिद्वार से डासना तक पैदल कांवड़ यात्रा पूरी करना आसान नहीं है और महिलाओं ने दृढ़ संकल्प के साथ अपनी यात्रा पूरी की है।

उन्होंने महिलाओं के बुर्का छोड़ने के फैसले का भी उल्लेख किया और इस संबंध में अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने बुर्के को महिलाओं की गुलामी का प्रतीक बताते हुए इसे छोड़ने की अपील की।महामंडलेश्वर ने कहा कि सनातन धर्म के अनुयायी और भगवान महादेव के भक्त होने के नाते मानवता के लिए खड़ा होना उनका कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति को मिटाने का अधिकार नहीं है।

इसके बाद मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के साथ हर हर महादेव के जयकारे भी लगाए गए।

महिला बोलीं, सनातन धर्म बहुत अच्छा है

मंदिर परिसर में मौजूद तीन महिलाओं में से एक ने कहा कि सनातन धर्म बहुत अच्छा है और मंदिर में उनका बहुत सम्मान किया गया। महिलाओं ने बताया कि हरिद्वार से गंगाजल लेकर कांवड़ के साथ डासना तक पहुंचना उनके लिए आस्था और संकल्प से जुड़ा अनुभव रहा।महिलाओं के अनुसार उन्होंने श्रद्धा के साथ हरिद्वार से गंगाजल लिया और पैदल यात्रा कर डासना मंदिर पहुंचीं। मंदिर पहुंचने के बाद भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया।

सोशल मीडिया पर चर्चा में आई तस्वीरें

तीनों मुस्लिम महिलाओं के हरिद्वार से गंगाजल लेकर डासना मंदिर पहुंचने और भगवान शिव का जलाभिषेक करने की तस्वीरें और वीडियो चर्चा में हैं। सावन के दौरान सामने आई इस घटना ने धार्मिक आस्था, व्यक्तिगत विश्वास और आपसी सम्मान को लेकर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।

डासना मंदिर में महिलाओं के स्वागत और सम्मान के दौरान श्रद्धालुओं ने भी उनका उत्साह बढ़ाया। हर हर महादेव के जयकारों के बीच महिलाओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया और अपनी कांवड़ यात्रा पूरी की।

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