शिवम भारती स्कूल से ननपुर रोड तक बदहाल रास्ता, सतरीख–कमलेशपुर रोड और अशरफ विहार की सड़क भी बदहाली की शिकार
लखनऊ। सड़कें विकास की पहचान होती हैं, लेकिन यहां हालात इसके बिल्कुल उलट नजर आ रहे हैं। शिवम भारती स्कूल से ननपुर रोड की ओर जाने वाली सड़क, सतरीख–कमलेशपुर रोड और अशरफ विहार कॉलोनी को जोड़ने वाला मार्ग गड्ढों में तब्दील हो चुका है। सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे हादसों को खुला न्योता दे रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग की नींद टूटने का नाम नहीं ले रही।
सड़क नहीं, गड्ढों का जाल! रोज जान जोखिम में डाल रहे लोग

स्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क की हालत इतनी खराब है कि वाहन चालकों को हर कदम पर खतरा बना रहता है। बड़े-बड़े गड्ढों से बचने के चक्कर में दोपहिया वाहन चालक और राहगीर असंतुलित होकर गिरने का जोखिम उठाते हैं।
लोगों का आरोप है कि आए दिन वाहन गड्ढों में फंस रहे हैं और छोटी-बड़ी दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है। इसके बावजूद सड़क की मरम्मत को लेकर जिम्मेदारों की ओर से ठोस कदम नहीं उठाया गया।
भारी ट्रक-डंपरों ने सड़क की कमर तोड़ी, जिम्मेदार मौन

इस मार्ग पर भारी ट्रकों और डंपरों की लगातार आवाजाही ने सड़क की हालत और खराब कर दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भारी वाहनों के दबाव के चलते सड़क लगातार टूटती जा रही है।
सवाल यह है कि जब सड़क पर भारी वाहनों की आवाजाही लगातार जारी है तो उनकी आवाजाही को नियंत्रित और व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
स्कूल के सामने खतरा, बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

सबसे गंभीर बात यह है कि इसी मार्ग पर शिवम भारती स्कूल और कस्तूरबा गांधी स्कूल स्थित हैं। रोजाना बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं इस रास्ते से गुजरते हैं।
एक तरफ गहरे गड्ढे और दूसरी तरफ तेज रफ्तार भारी वाहन—ऐसे में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता जायज है। अगर किसी दिन कोई बड़ा हादसा हो गया तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
शिकायतें बेअसर, कागजों में ही दौड़ रहा समाधान?

स्थानीय निवासियों का दावा है कि सड़क की बदहाली को लेकर संबंधित विभाग से कई बार शिकायत की जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद मौके पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होना जिम्मेदार विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति, स्थायी समाधान की मांग

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल सड़क का निरीक्षण कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल गड्ढों पर औपचारिक पैबंद लगाने से समस्या खत्म नहीं होगी।
उन्होंने सड़क की गुणवत्तापूर्ण मरम्मत, जरूरत के अनुसार पुनर्निर्माण और चौड़ीकरण कराने के साथ भारी वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने की मांग की है।
हादसा होने का इंतजार कर रहा है सिस्टम?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिम्मेदार विभाग किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा? जब स्कूल जाने वाले बच्चे रोज इसी बदहाल सड़क से गुजर रहे हैं और भारी वाहनों की आवाजाही भी जारी है, तो फिर तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं?
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। लोगों ने जनहित और स्कूली बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन से तत्काल मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करने की मांग की है।
जनता का प्रशासन से सीधा सवाल

गड्ढों से भरी सड़क कब ठीक होगी?
स्कूली बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
भारी वाहनों की आवाजाही पर लगाम कब लगेगी?
और शिकायतों के बावजूद अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
इन सवालों के जवाब अब स्थानीय लोग और अभिभावक जिम्मेदार विभाग से मांग रहे हैं।
