समाजवादी पार्टी की नई स्टार प्रचारक लिस्ट ने पार्टी के भीतर एक बार फिर हलचल मचा दी है। इस लिस्ट में जहां सीनियर नेता आज़म खान का नाम शामिल किया गया है, वहीं शिवपाल सिंह यादव और राम गोपाल यादव का नाम गायब रहना सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।शिवपाल यादव को लंबे समय से अखिलेश यादव के बाद पार्टी का सबसे प्रभावशाली चेहरा माना जाता रहा है।
वह न केवल पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में से हैं, बल्कि पहले भी महागठबंधन के आयोजनों में समाजवादी पार्टी का नेतृत्व कर चुके हैं।ऐसे में इस बार उनका नाम प्रचारक सूची से गायब रहना कई संकेत छोड़ गया है।राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह या तो रणनीतिक फैसला है, या फिर पार्टी के भीतर पारिवारिक समीकरणों में एक बार फिर खटास का संकेत।क्योंकि राम गोपाल यादव भले ही अक्सर उत्तर प्रदेश से बाहर प्रचार नहीं करते, लेकिन शिवपाल यादव का न होना निश्चित रूप से ध्यान खींचने वाला कदम है।
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लिस्ट में रामपुर के वरिष्ठ नेता आज़म खान का नाम शामिल होना कई मायनों में अहम माना जा रहा है।हालांकि, सवाल यह भी है कि क्या वह वाकई बिहार जाकर प्रचार करेंगे?क्योंकि हाल ही में उनकी तबीयत बार-बार बिगड़ रही है और वह दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती हैं।फिर भी उनका नाम शामिल है और लेकिन चाचा का नाम गायब है इसीलिए इस लिस्ट ने एक बार फिर यादव परिवार की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।शिवपाल यादव का नाम गायब होना और आज़म खान की नाममात्र की मौजूदगी इस ओर इशारा कर सकती है कि सपा के भीतर अब भी रणनीतिक मतभेद बाकी हैं।लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव इस बार 2027 को ध्यान में रखते हुए हर कदम सोच-समझकर रख रहे हैं।उनकी कोशिश है कि बिहार चुनाव के जरिए वह राष्ट्रीय राजनीति में सपा की सक्रिय भूमिका दिखा सकें और अपने नेतृत्व को एक नए स्तर पर स्थापित करें।वो शिवपाल सिंह यादव के बिना



