हमास पर बोले इमरान मसूद, भगत सिंह भी आतंकवादी थे क्या?”भाजपा ने कांग्रेस से मांगा जवाब

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    कांग्रेस सांसद इमरान मसूद एक बार फिर विवादों में हैं इस बार वजह है उनका बयान, जिसमें उन्होंने महान स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह की तुलना फिलिस्तीनी संगठन हमास से कर दी। बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर बवाल मच गया और भाजपा नेताओं ने इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी।हालांकि, बढ़ते विवाद के बाद इमरान मसूद ने स्पष्टीकरण जारी किया, कहा “मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। भगत सिंह की तुलना किसी से नहीं की जा सकती। हर लड़ाई का अपना मकसद होता है।”

    इमरान मसूद ने क्या कहा था?

    इमरान मसूद ने कहा भगत सिंह हमारे सर का ताज हैं, उनकी तुलना किसी से नहीं हो सकती। हमास फिलिस्तीन में मारे गए लाखों बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए लड़ रहा है। भारत सरकार ने भी फिलिस्तीन का UN में समर्थन किया है और मदद भेजी है। अगर हमास आतंकी संगठन है, तो भारत सरकार उसे आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल क्यों नहीं करती?

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    विवाद कैसे शुरू हुआ?

    दरअसल, एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि “क्या हमास एक आतंकी संगठन है?”तो मसूद ने पलटकर कहा “क्या भगत सिंह भी आतंकवादी थे?” इसके बाद उन्होंने जोड़ा “हमास अपनी जमीन के लिए लड़ रहा है, जैसे भगत सिंह ने अपनी जमीन और आजादी के लिए लड़ाई लड़ी थी। आपके लिए हमास आतंकवादी हो सकता है, लेकिन मेरे लिए वे आजादी के लिए लड़ने वाले लोग हैं।”इस बयान के बाद मसूद की तीखी आलोचना हुई और भाजपा ने कांग्रेस पर राष्ट्रवाद को अपमानित करने का आरोप लगाया।

    ऑपरेशन सिंदूर पर भी साधा निशाना

    इमरान मसूद ने एक और बयान में कहा अगर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को उपलब्धि बताया जा रहा है, तो असली सफलता तब होती जब भारत POK पर कब्जा कर लेता और तिरंगा लहराता। इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश बनाकर अपनी ताकत दिखा दी थी लेकिन इस सरकार ने ऐसा क्यों नहीं किया?”

    क्या है ‘ऑपरेशन सिंदूर’?

    ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारतीय सशस्त्र बलों की एक बड़ी एयरस्ट्राइक थी,जो पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर की गई थी।यह हमला पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में किया गया था।
    इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के 9 ठिकानों को ध्वस्त किया था।इसका नाम उन वीर शहीदों की पत्नियों की याद में रखा गया, जिन्होंने अपने पति को उस हमले में खो दिया था — इसलिए इसका नाम रखा गया “ऑपरेशन सिंदूर।”

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