बीजेपी नेता संगीत सोम का विवादित बयान
उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बुर्के को लेकर नया विवाद छिड़ गया है। बीजेपी के कद्दावर नेता संगीत सोम ने एक बयान देते हुए कहा कि-
“एयरपोर्ट पर चेहरा दिखाएंगे, हज पर चेहरा दिखाएंगे, लेकिन चुनाव में क्यों नहीं?”
उन्होंने आरोप लगाया कि “बुर्के की आड़ में आतंकवाद और फर्जीवाड़ा दोनों होते हैं।”
संगीत सोम ने यह भी कहा कि वह चुनाव आयोग से मांग करेंगे कि वोटिंग के दौरान बुर्का पहनने वाली महिलाओं का चेहरा दिखाकर ही मतदान कराया जाए, ताकि फर्जी वोटिंग पर रोक लगाई जा सके।
विपक्षी नेताओं पर साधा निशाना
अपने बयान में संगीत सोम ने यह भी जोड़ा कि
“मेरी इस बात पर तेजस्वी, अखिलेश और राहुल गांधी आंदोलन करेंगे और कहेंगे कि मैंने कंट्रोवर्सी बोली है।”
उन्होंने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे धार्मिक मुद्दों पर राजनीति कर रहे हैं और वोट बैंक के लिए आतंकवाद जैसी गंभीर समस्या को नजरअंदाज कर रहे हैं।
सांसद जियाउर्रहमान बर्क का पलटवार
संगीत सोम के बयान के बाद संभल के सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि-
“संगीत सोम जैसे लोगों को जनता नकार चुकी है। इन्हें बुर्के, टोपी और दाढ़ी में दहशतगर्दी नजर आती है।”
बर्क ने कहा कि
”बुर्का इस्लाम की शालीनता और आस्था का प्रतीक है, जिससे “शराफत झलकती है, न कि आतंकवाद।”
सांसद ने साध्वी प्राची और संगीत सोम दोनों पर निशाना साधते हुए कहा कि ये नेता हिंदू-मुस्लिम करके राजनीति में वापस आने की कोशिश कर रहे हैं।
साध्वी प्राची के बयान पर भी उठी कार्रवाई की मांग
जियाउर्रहमान बर्क ने साध्वी प्राची के हालिया बयान—जिसमें उन्होंने “दंगे में शामिल नाबालिग बच्चों की नसबंदी” की बात कही थी—की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान समाज में नफरत फैलाने वाले हैं और साध्वी प्राची के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जानी चाहिए।
धर्म और राजनीति का टकराव फिर चर्चा में
संगीत सोम और जियाउर्रहमान बर्क के बीच यह बयानबाज़ी फिर से उस बहस को हवा दे रही है जिसमें धर्म, पहचान और राजनीति के गठजोड़ को लेकर सवाल उठ रहे हैं। चुनावी माहौल में बुर्का, धर्म और पहचान जैसे मुद्दे एक बार फिर सियासी एजेंडा बनते दिख रहे हैं।



