केशव मौर्य बोले — “लोकतंत्र के असली दुश्मन हैं सुधारों का विरोध करने वाले दल”
बिहार विधानसभा चुनाव के बीच अब SIR (Special Intensive Revision) यानी मतदाता सूची के गहन पुनर्निरीक्षण का मुद्दा सियासी बहस का नया केंद्र बन गया है। इस पर विपक्षी दलों द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने तीखा पलटवार किया है।
केशव प्रसाद मौर्य का ट्वीट बना चर्चा का विषय
केशव प्रसाद मौर्य ने अपने आधिकारिक X (ट्विटर) हैंडल पर लिखा —
“चुनाव आयोग के 12 राज्यों में मतदाता सूची के गहन पुनर्निरीक्षण यानी SIR तैयार करने की नेक क़वायद पर सवाल उठाने वाले दल लोकतंत्र के असल दुश्मन हैं। ऐसे सुधारों पर खासकर वंशवादी दल कुछ ज्यादा ही हल्ला-गुल्ला करते हैं क्योंकि उनकी पूरी राजनीति ही चुनावी फ़र्ज़ीवाड़े पर टिकी होती है।”
मौर्य के इस बयान के बाद बिहार की सियासत में नई सरगर्मी देखने को मिल रही है।
विपक्ष और एनडीए में बढ़ी बयानबाज़ी
विपक्षी दलों ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि वह “चुनावी एजेंडा तय करने की कोशिश” कर रही है। वहीं, एनडीए खेमे का कहना है कि यह पहल चुनावी पारदर्शिता की दिशा में “महत्वपूर्ण कदम” है।
चुनाव आयोग की पहल क्या है?
चुनाव आयोग ने 12 राज्यों में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया की घोषणा की है। इसका उद्देश्य है —
- पुराने,
- दोहराए गए, या
- मृत मतदाताओं के नाम हटाना,
ताकि मतदाता सूची सटीक और निष्पक्ष बनाई जा सके।
राजनीतिक मायने
SIR को लेकर मौर्य का बयान न सिर्फ बिहार चुनाव की सियासत में नई हलचल ला रहा है, बल्कि यह वंशवादी राजनीति बनाम पारदर्शी लोकतंत्र की बहस को भी तेज कर रहा है।



