उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में मौनी अमावस्या स्नान को लेकर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच जारी टकराव अब और तीखा होता जा रहा है। इसी बीच हरियाणा के सोनीपत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक बयान ने इस विवाद को नया मोड़ दे दिया है। सीएम योगी ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि“धर्म की आड़ में सनातन को कमजोर करने वाले तमाम कालनेमि मौजूद हैं, ऐसे लोगों से समाज को सावधान रहना होगा।”
योगी के बयान पर अविमुक्तेश्वरानंद की तीखी प्रतिक्रिया
सीएम योगी के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि मुख्यमंत्री बिल्कुल सही कह रहे हैं, लेकिन वे यह स्वीकार नहीं कर पा रहे कि कालनेमि उनके अपने प्रशासन में बैठे हैं।
उन्होंने दो टूक कहा—
“मुख्यमंत्री की बात सही है, कालनेमियों से सावधान रहना चाहिए। लेकिन सनातन का अपमान उनके अधिकारी और प्रयागराज मेला प्राधिकरण के लोग कर रहे हैं। यही लोग सनातन को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं।”
धरने से लेकर नोटिस तक, टकराव चरम पर
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद प्रशासन के रवैये से आहत होकर धरने पर बैठ चुके हैं। उधर मेला प्रशासन ने उन्हें नोटिस भेजकर सवाल उठाया कि वे अपने नाम के आगे ‘शंकराचार्य’ कैसे लिख रहे हैं, जबकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।इसके जवाब में शंकराचार्य ने प्रशासन को कानूनी नोटिस भेज दिया है। इतना ही नहीं, प्रशासन की ओर से मेला क्षेत्र में आश्रम को भूमि आवंटन न करने की चेतावनी भी दी गई है, जिससे विवाद और भड़क गया है।
शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती का बड़ा बयान
इस पूरे मामले पर पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती भी खुलकर सामने आए हैं। उन्होंने मेला प्रशासन के नोटिस को बेहद गंभीर बताते हुए कहा “यह सनातन के साथ टकराव नहीं, बल्कि भयंकर युद्ध को आमंत्रण है। जब तक हमारा खून नहीं खौल रहा, तब तक ऐसे अपमान चलते रहेंगे।”
सत्ता बनाम संत—संघर्ष और गहराया
एक ओर योगी सरकार सनातन की रक्षा का दावा कर रही है, तो दूसरी ओर देश के शीर्ष शंकराचार्य प्रशासन को ही सनातन विरोधी ठहरा रहे हैं। यह विवाद अब केवल मेला या स्नान तक सीमित नहीं, बल्कि धर्म, सत्ता और अधिकार के सीधे टकराव में बदल चुका है।





