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संसद में बड़े बदलाव की तैयारी: नए बिल से बदल सकता है चुनाव और प्रतिनिधित्व का तरीका

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केंद्र सरकार 16 से 18 अप्रैल तक होने वाले संसद सत्र में तीन अहम बिल पेश करने जा रही है। इनमें परिसीमन (Delimitation), संविधान संशोधन और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े कानूनों में बदलाव शामिल हैं। इन बिलों को भारतीय राजनीति के लिए एक बड़ा बदलाव यानी ‘टर्निंग पॉइंट’ माना जा रहा है, क्योंकि इनका असर देश की चुनावी व्यवस्था और प्रतिनिधित्व पर सीधा पड़ेगा।

इन तीनों में सबसे महत्वपूर्ण है संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026। इस बिल के जरिए संविधान के कई अनुच्छेदों में बदलाव प्रस्तावित है। इसका मुख्य उद्देश्य जनसंख्या की नई परिभाषा तय करना, संसद और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाना और महिलाओं को आरक्षण देना है।

लोकसभा सीटों में बड़ा बदलाव

अभी देश में लोकसभा की 543 सीटें हैं, जो 1971 की जनगणना के आधार पर तय की गई थीं। लेकिन अब देश की आबादी काफी बढ़ चुकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार सांसदों की संख्या बढ़ाने की तैयारी कर रही है।

नए प्रस्ताव के मुताबिक:

  • राज्यों से चुने जाने वाले सांसदों की संख्या बढ़ाकर 815 तक की जा सकती है
  • केंद्र शासित प्रदेशों से सांसदों की संख्या बढ़ाकर 35 की जा सकती है

इस बदलाव के लिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन किया जा रहा है।

जनसंख्या की नई परिभाषा

अब तक ‘जनसंख्या’ का मतलब ताजा जनगणना से लिया जाता था। लेकिन नए बिल के बाद जनसंख्या का आधार वही आंकड़े होंगे, जिन्हें संसद कानून के जरिए तय करेगी और आधिकारिक रूप से प्रकाशित करेगी। इससे चुनावी गणना और सीटों का बंटवारा अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित हो सकेगा।

परिसीमन प्रक्रिया में बदलाव

अनुच्छेद 82 में भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। पहले हर जनगणना के बाद परिसीमन अपने आप शुरू हो जाता था। अब ऐसा नहीं होगा।
नई व्यवस्था के तहत:

  • परिसीमन कब और कैसे होगा, यह संसद तय करेगी
  • परिसीमन आयोग को ज्यादा अधिकार दिए जाएंगे
  • सीटों के बंटवारे की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा

इससे चुनावी सीमाओं को तय करने में ज्यादा स्पष्टता आएगी।

राज्य विधानसभाओं पर भी असर

अनुच्छेद 170 में बदलाव के जरिए राज्य विधानसभाओं में भी सीटों का निर्धारण नई जनसंख्या के आधार पर होगा। इसके अलावा कुछ पुराने प्रावधान हटाए गए हैं और पूरी प्रक्रिया को परिसीमन आयोग के अधीन कर दिया गया है।

SC/ST आरक्षण में भी बदलाव

अनुच्छेद 330 और 332 में संशोधन के जरिए अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए सीट आरक्षण की व्यवस्था को नई जनसंख्या के अनुसार अपडेट किया जाएगा। खासकर पूर्वोत्तर राज्यों जैसे अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड में नई व्यवस्था लागू होगी।

महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी

इस बिल का सबसे अहम हिस्सा महिलाओं को राजनीतिक आरक्षण देना है। नए प्रावधान के तहत:

  • लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण मिलेगा
  • यह आरक्षण परिसीमन के बाद लागू होगा
  • आरक्षित सीटें हर चुनाव में बदलती रहेंगी (रोटेशन सिस्टम)
  • यह व्यवस्था 15 साल तक लागू रहेगी

दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी यह लागू होगा।

अब जनगणना का इंतजार नहीं

पहले महिला आरक्षण को जनगणना से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन अब इसे परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ दिया गया है। यानी जैसे ही परिसीमन पूरा होगा, वैसे ही महिला आरक्षण लागू हो जाएगा।

इस बदलाव का क्या मतलब है?

इन सभी बदलावों का सीधा असर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पड़ेगा।

  • संसद और विधानसभा में प्रतिनिधित्व ज्यादा संतुलित होगा
  • बढ़ती आबादी के हिसाब से सीटें बढ़ेंगी
  • महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी
  • चुनाव प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और व्यवस्थित होगी

कुल मिलाकर, ये बिल भारत की राजनीति और चुनावी सिस्टम को नया रूप देने की दिशा में एक बड़ा कदम माने जा रहे हैं। आने वाले समय में इनका असर देश की राजनीति में साफ दिखाई दे सकता है।

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