Punjab की राजनीति में एक बार फिर पुराने सहयोगियों के साथ आने की अटकलें तेज हो गई हैं। Bharatiya Janata Party ने पश्चिम बंगाल में मिली बड़ी चुनावी सफलता के बाद अब पंजाब पर अपना फोकस बढ़ा दिया है। अगले साल संभावित विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की तैयारी में जुटी हुई है।
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि क्या करीब छह साल बाद भाजपा और Shiromani Akali Dal के बीच फिर से गठबंधन हो सकता है। हालांकि अभी तक दोनों दलों की ओर से कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है, लेकिन बदलते राजनीतिक हालात ने इस संभावना को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
पंजाब में कमजोर प्रदर्शन के बाद नई रणनीति
बीते विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव और उपचुनावों में भाजपा को पंजाब में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई थी। किसान आंदोलन के बाद राज्य में पार्टी के खिलाफ माहौल बना, जिसका असर चुनावी नतीजों में भी देखने को मिला। ऐसे में अब भाजपा नई रणनीति के साथ पंजाब में वापसी की कोशिश कर रही है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार पार्टी सिर्फ आक्रामक राष्ट्रवाद या हिंदुत्व की राजनीति पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय मुद्दों पर भी ज्यादा फोकस कर सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में केंद्र सरकार की योजनाओं का प्रचार बढ़ाया जा रहा है और किसानों के बीच पार्टी अपनी स्वीकार्यता सुधारने की कोशिश कर रही है।
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अकाली दल के साथ गठबंधन पर नजर
भाजपा और अकाली दल का गठबंधन कभी पंजाब की राजनीति का सबसे मजबूत समीकरण माना जाता था। दोनों दल लंबे समय तक साथ मिलकर चुनाव लड़ते रहे, लेकिन कृषि कानूनों को लेकर हुए विवाद के बाद यह गठबंधन टूट गया था।
अब जब पंजाब की राजनीति नए मोड़ पर खड़ी है, तो यह सवाल फिर उठने लगा है कि क्या दोनों दल राजनीतिक मजबूरी या रणनीतिक कारणों से दोबारा साथ आ सकते हैं। जानकारों का कहना है कि अगर भाजपा को पंजाब में मजबूत वापसी करनी है, तो उसे किसी बड़े क्षेत्रीय सहयोगी की जरूरत पड़ सकती है।
AAP पर भाजपा का फोकस
इस बीच Aam Aadmi Party भी भाजपा के निशाने पर है। हाल ही में आम आदमी पार्टी के छह राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने की चर्चा ने राज्य की राजनीति को और गर्म कर दिया है। इसे भाजपा की उस रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिसके जरिए वह पंजाब में AAP के संगठनात्मक ढांचे को कमजोर करना चाहती है।
अब राजनीतिक नजरें आम आदमी पार्टी के विधायकों और स्थानीय नेताओं पर भी टिकी हुई हैं। भाजपा लगातार राज्य सरकार को कानून-व्यवस्था, नशे की समस्या और महिलाओं से किए गए वादों के मुद्दे पर घेर रही है।
चुनाव से पहले नैरेटिव की जंग
भाजपा का आरोप है कि Aam Aadmi Party के शासन में पंजाब में कानून-व्यवस्था कमजोर हुई है और राज्य “जंगलराज” जैसी स्थिति की ओर बढ़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल भाजपा पर राजनीतिक माहौल बदलने के लिए आक्रामक रणनीति अपनाने का आरोप लगा रहे हैं।
कुल मिलाकर, पंजाब में आगामी चुनाव सिर्फ सीटों की लड़ाई नहीं बल्कि राजनीतिक नैरेटिव की बड़ी जंग बनने जा रहे हैं। एक ओर भाजपा अपने पुराने नुकसान की भरपाई करना चाहती है, तो दूसरी ओर क्षेत्रीय दल अपने जनाधार को बचाने में जुटे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या पंजाब की राजनीति में पुराने साथी फिर साथ आते हैं या राज्य में कोई नया समीकरण उभरकर सामने आता है।






