Bihar में नई सरकार के गठन के 22 दिन बाद आखिरकार बहुप्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार पूरा हो गया। राजधानी Patna के ऐतिहासिक Gandhi Maidan में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह के बाद देर शाम मंत्रियों के विभागों का भी बंटवारा कर दिया गया। इस विस्तार के साथ ही मुख्यमंत्री Samrat Choudhary की सरकार अब पूरी तरह सक्रिय मोड में दिखाई दे रही है।
नई कैबिनेट में सत्ता संतुलन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और महिला भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है। खास बात यह रही कि इस बार सरकार में पांच महिला मंत्रियों को शामिल किया गया है, जिन्हें अहम विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
महिला मंत्रियों को मिली अहम जिम्मेदारी
कैबिनेट में शामिल पांच महिला मंत्रियों में तीन जदयू और दो भाजपा कोटे से हैं। जदयू की वरिष्ठ नेता Leshi Singh को भवन निर्माण विभाग सौंपा गया है। वहीं पहली बार मंत्री बनीं Shweta Gupta को समाज कल्याण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा Sheela Kumari को विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग का प्रभार मिला है।भाजपा की ओर से Rama Nishad को पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग दिया गया है। वहीं अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज रह चुकीं Shreyasi Singh को उद्योग और खेल विभाग की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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NDA ने दिया एकजुटता का संदेश
नई कैबिनेट में कुल 32 मंत्रियों ने शपथ ली है। इनमें भाजपा के 15, जदयू के 13, Lok Janshakti Party (Ram Vilas) के 2, Hindustani Awam Morcha का 1 और Rashtriya Lok Morcha का 1 मंत्री शामिल है। इससे साफ संकेत मिलता है कि एनडीए गठबंधन ने सहयोगी दलों को साथ लेकर चलने की रणनीति पर जोर दिया है।
मुख्यमंत्री ने अपने पास रखे अहम विभाग
मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने गृह विभाग समेत छह महत्वपूर्ण विभाग अपने पास रखे हैं। वहीं अनुभवी नेता और डिप्टी सीएम Bijendra Prasad Yadav को वित्त विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। वरिष्ठ नेता Vijay Kumar Choudhary को जल संसाधन विभाग सौंपा गया है।
अब सरकार की प्राथमिकताओं पर नजर
कैबिनेट विस्तार के बाद अब बिहार सरकार पूरी तरह प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से सक्रिय दिखाई दे रही है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में रोजगार, बुनियादी ढांचे, सामाजिक कल्याण और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे सरकार की प्राथमिकता में रहेंगे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कैबिनेट विस्तार सिर्फ विभागों के बंटवारे तक सीमित नहीं है, बल्कि 2026 के राजनीतिक समीकरणों और सामाजिक संतुलन को साधने की रणनीति का हिस्सा भी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि नई टीम बिहार के विकास एजेंडे को कितनी तेजी से आगे बढ़ा पाती है।






