बिहार में विधान परिषद की खाली हो रही 10 सीटों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनाव आयोग की ओर से जल्द ही चुनाव कार्यक्रम घोषित किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसी के साथ राज्य की सियासत में बैठकों, रणनीतियों और संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाओं का दौर भी शुरू हो गया है। खासतौर पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर उम्मीदवारों के चयन को लेकर गहन मंथन चल रहा है।
सूत्रों के अनुसार, Nishant Kumar और Deepak Prakash का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं को विधान परिषद भेजा जा सकता है। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि इनके नाम लगभग तय माने जा रहे हैं। हालांकि अभी तक NDA की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
इसके अलावा Lok Janshakti Party (Ram Vilas) को भी गठबंधन की ओर से एक सीट दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। सीटों के बंटवारे को लेकर Bharatiya Janata Party, Janata Dal (United) और सहयोगी दलों के बीच लगातार बैठकों का दौर जारी है। माना जा रहा है कि इस चुनाव के जरिए NDA आगामी राजनीतिक समीकरणों को भी साधने की कोशिश कर रहा है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार बीजेपी और जेडीयू दोनों ही ऐसे नेताओं को मौका दे सकती हैं, जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इसके साथ ही उन नेताओं को भी संतुष्ट करने की रणनीति बनाई जा रही है, जो लंबे समय से बड़ी जिम्मेदारी का इंतजार कर रहे हैं। यही वजह है कि संभावित दावेदारों की लॉबिंग भी तेज हो गई है।
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इस चुनाव में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। बिहार की राजनीति में सामाजिक संतुलन हमेशा से अहम मुद्दा रहा है और इसी को ध्यान में रखते हुए ऐसे चेहरों की तलाश की जा रही है, जिनकी संगठन में मजबूत पकड़ हो और जो अलग-अलग सामाजिक वर्गों का प्रतिनिधित्व कर सकें।
विधान परिषद की जिन 10 सीटों पर चुनाव होना है, उनमें एक सीट उपचुनाव के तहत भरी जाएगी। बीजेपी की ओर से Samrat Choudhary के इस्तीफे के बाद एक सीट खाली हुई है, जबकि संजय प्रकाश का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। वहीं जेडीयू में कुमुद वर्मा, गुलाम गौस, भीष्म सहनी और श्रीभगवान सिंह कुशवाहा के इस्तीफे से कई सीटें रिक्त हुई हैं।
इसके अलावा Rashtriya Janata Dal के नेताओं सुनील कुमार सिंह और मोहम्मद फारुक की सीटें भी खाली हो रही हैं। वहीं Indian National Congress से समीर कुमार का कार्यकाल भी समाप्त होने वाला है।
विपक्ष भी इस चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रहा है। Tejashwi Yadav के नेतृत्व वाली आरजेडी सामाजिक और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों के चयन की तैयारी में जुटी हुई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह विधान परिषद चुनाव केवल सीटों का मुकाबला नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों में बिहार की राजनीति की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत भी साबित हो सकता है।






